
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 के दौरान हुई कथित आर्थिक अनियमितताओं के 18 वर्ष पुराने मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने कार्रवाई की है। ब्यूरो ने सोमवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश, कांकेर की अदालत में तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ सहित आठ अधिकारियों के विरुद्ध करीब 6,000 पृष्ठों का चालान प्रस्तुत किया है।
मामला मनरेगा के तहत विभिन्न सामग्रियों की खरीदी में ₹1,69,14,247 की आर्थिक अनियमितता से जुड़ा है। विवेचना में सामने आया कि निर्धारित निविदा प्रक्रिया और शासकीय खरीद नियमों का पालन किए बिना सामग्री खरीदी गई तथा अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कांकेर के.पी. देवांगन ने वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 में जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी कराई, जबकि शासन के नियमों के अनुसार सामग्री खरीदने का अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को स्वतंत्र रूप से दिया गया था।
जांच में पाया गया कि फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन पत्रक, रोजगार गारंटी योजना मार्गदर्शिका, रोजगार उपलब्धता पंजी, फ्लेक्सी कोबरा फाइल कवर, मस्टर रोल पत्रक तथा श्रमिक जानकारी पत्रक सहित कई सामग्रियों की खरीदी में छत्तीसगढ़ पंचायत (सामग्री तथा माल क्रय) नियम, छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम तथा अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया।
ईओडब्ल्यू ने जिन अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश किया है, उनमें तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के.पी. देवांगन के अलावा सात तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ शामिल हैं।
आरोपियों में राधाकांत कर (जनपद पंचायत कांकेर), गोवर्धन गजबल्ला (नरहरपुर), परदेशी राम मरकाम (चारामा), भारत राम नेताम (अंतागढ़), रामकिशुन ध्रुव (कोयलीबेड़ा), जी.आर. ठाकुर (भानुप्रतापपुर) तथा संवालदास बघेल (दुर्गकोंदल) के नाम शामिल हैं।
जांच में जिला पंचायत कांकेर और सात जनपद पंचायतों में निम्नानुसार अनियमित व्यय और आर्थिक नुकसान के साक्ष्य मिले -
इन सभी को मिलाकर कुल ₹1,69,14,247 की शासकीय राशि के अपव्यय, अनियमित व्यय और अमानत में खयानत के साक्ष्य पाए गए हैं।
विवेचना में ईओडब्ल्यू ने पाया कि आरोपियों ने आपसी षड्यंत्र और सांठगांठ के तहत निर्धारित खरीद प्रक्रिया को दरकिनार किया। बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए सामग्री खरीदी गई तथा शासकीय पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का अनियमित उपयोग किया गया।
इसी आधार पर सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत कार्रवाई की गई है।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि मुख्य आरोपी के.पी. देवांगन के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। उनके विरुद्ध पहले से भ्रष्टाचार और शासकीय पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य मामले भी दर्ज हैं। अपराध क्रमांक 51/2009 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चयन प्रक्रिया में हेराफेरी कर अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है, जिसमें अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
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वहीं अपराध क्रमांक 58/2010 में शासकीय पद के दुरुपयोग और खरीद नियमों के उल्लंघन के जरिए ₹8.44 करोड़ से अधिक के लोकधन के कथित दुरुपयोग का मामला दर्ज है। इस प्रकरण में भी आरोपी के खिलाफ चालान न्यायालय में पेश किया जा चुका है।