
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। खेत में धान की फसल लहलहा रही है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसका रकबा शून्य दर्ज है। कहीं किसान के खेत का नक्शा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहा तो कहीं अलग-अलग खसरे एक ही लोकेशन पर दिखाई दे रहे हैं।
फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप और ऑनलाइन गिरदावरी के आंकड़ों में सामने आ रही ऐसी गड़बड़ियां अब किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। धान खरीदी का समय नजदीक है और रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ तो किसानों को अपनी ही उपज समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए परेशान होना पड़ सकता है।
रायपुर के कचना क्षेत्र में सर्वेयर सर्वे करने गए तो वो एक खेत में सर्वे कर रहे थे और उनकी लोकेशन कचना तालाब के बीच में दिख रही थी। यह डिजिटल मैपिंग की बड़ी खामी को दर्शाता है। किसानों का कहना है कि जब लोकेशन ही गलत दिखेगी तो सत्यापन कैसे सही होगा।
रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड के ग्राम दर्रामुंडा में पीवी ऐप की गड़बड़ी के उदाहरण सामने आए हैं। यहां खसरा नंबर 6/3 और 7/5 की वास्तविक लोकेशन अलग-अलग होने के बावजूद ऐप में एक ही स्थान पर दिखाई देने की शिकायत है। इसी तरह खसरा नंबर 10/1/क, 10/1/ख और 11/2/ख भी एक ही लोकेशन पर प्रदर्शित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, नक्शे में खसरा नंबरों का क्रम भी गड़बड़ नजर आ रहा है। जहां 10 और 11 नंबर के खसरे होने चाहिए, उसी लोकेशन पर 112 और 113 नंबर के खसरे भी दिखाई दे रहे हैं।
दूसरी ओर सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में ऑनलाइन गिरदावरी की त्रुटियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। महुली, खोहीर, बैजनपाठ, लूलह, रामगढ़, जुड़वानिया, कोल्हुआ, चोंगा, कचवारी और करौती सहित आसपास के गांवों के किसानों की शिकायत है कि खेतों में धान की फसल खड़ी होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में धान का रकबा शून्य दिखाई दे रहा है। किसान जल्द सुधार की मांग कर रहे हैं।