
राज्य ब्यूरो, रायपुर: तेजी से होते शहरी विस्तार और आधुनिक जीवनशैली के चलते राजधानी रायपुर छत्तीसगढ़ में बिजली खपत का सबसे बड़ा केंद्र है। वर्तमान में राज्य में कुल बिजली की पीक डिमांड लगभग 5,900 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिसमें अकेले रायपुर की हिस्सेदारी 508 मेगावाट से अधिक है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो प्रदेश में खपत होने वाली हर 10 यूनिट बिजली में से एक यूनिट अकेले रायपुर में खर्च हो रही है। अप्रैल 2023 में रायपुर का लोड 439 मेगावाट था, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 508 मेगावाट हो गया। इस दौरान उपभोक्ता भी 4.24 लाख से बढ़कर 4.83 लाख हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता (Installed Capacity) वर्तमान में लगभग 29,800 मेगावाट (केंद्रीय, राज्य और निजी क्षेत्रों को मिलाकर) है। हालांकि, पीक टाइम (शाम और रात के समय) में जब राज्य की मांग 5,900 मेगावाट के पार जाती है, तब वितरण प्रणाली और ग्रिड पर दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है।
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, अब घरों में कूलर की जगह एक से अधिक एसी का उपयोग होने लगा है। इसके साथ ही रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच लोग अपने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को चार्जिंग पर लगा रहे हैं। इसी दौरान घरों में एसी भी पूरे लोड पर होते हैं, जिससे ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में एक महीने के भीतर प्रदेश में 200 से अधिक ट्रांसफार्मर बदलने पड़े हैं, जिनमें से 100 अकेले रायपुर के हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रांसफार्मर के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाले विशेष इंसुलेटिंग तेल (Transformer Oil) की कमी ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।
भविष्य में ईवी और एसी का चलन और बढ़ेगा, जिसके लिए दीर्घकालिक योजना जरूरी है। कंपनी नए सब-स्टेशन और भारी क्षमता के ट्रांसफार्मर लगा रही है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे रात के बजाय सुबह के वक्त गाड़ियां चार्ज करें और अपने कनेक्शन को सिंगल फेस से थ्री फेस में बदलवाएं। -भीम सिंह कंवर, एमडी छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी