छत्तीसगढ़ में सियासत का हाॅट टाक, मतांतरित ईसाइयों की डीलिस्टिंग की मांग और उसका विरोध
छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की 'डी-लिस्टिंग' के मुद्दे पर राजनीति गर्मा गई है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बयान को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खारिज करते ...और पढ़ें
By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 10:30:25 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 10:49:30 AM (IST)
मतांतरण की प्रतीकात्मक तस्वीर। नईदुनिया अर्काइव राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। मतांतरण और आरक्षण से जुड़े डीलिस्टिंग (अनुसूचित जनजाति सूची से अलग करने) के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एक ओर जहां पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत ने इस कवायद को आदिवासियों की संख्या कम कर उनके संसाधनों पर कब्जे की साजिश बताया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगत के बयान को जनता को गुमराह करने वाला बताया है। वहीं डी लिस्टिंग की मांग पर दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने वाले जनजाति सुरक्षा मंच ने भी अपने तेवर कड़े कर दिए हैं।
कानूनी व व्यावहरिक जानकारी लेकर ही दें बयान
कपूर्व मंत्री अमरजीत भगत के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर तथ्यों की अनदेखी और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष को इस संवेदनशील विषय पर बयानबाजी करने से पहले कानूनी व व्यावहारिक तथ्यों की पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। अधूरी जानकारी के आधार पर जनता को गुमराह करना सर्वथा अनुचित है।
जल जंगल जमीन हड़पने की साजिश
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने डीलिस्टिंग की मांग का विरोध करते हुए इसे आदिवासियों की संख्या कम करने और उनके जल, जंगल व जमीन को हड़पने की साजिश करार दिया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर-जशपुर दौरे पर रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा में विपक्ष के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसी दौरान उन्होंने अपने गृह जिले जशपुर में रेल सुविधा के विस्तार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई चर्चा और इस पर हो रही त्वरित कार्रवाई की भी जानकारी दी।
दिल्ली में जुटे ढाई लाख आदिवासी
जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजाति समागम के बाद उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को समाज की भावनाओं से अवगत करा दिया है। शीर्ष नेतृत्व के हाव-भाव से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीर है।