
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत स्वीकृत करीब 14 हजार आवास अब भी अधूरे पड़े हैं। केंद्र सरकार द्वारा योजना के लिए अनुदान राशि जारी करने की समय-सीमा सितंबर तक निर्धारित होने के कारण राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
राज्य सरकार की ओर से भी नगरीय निकायों को सितंबर के बाद राज्यांश की राशि नहीं दी जाएगी। निर्धारित अवधि के भीतर आवासों का निर्माण पूरा नहीं होने पर निकायों को स्वयं के मद से शेष कार्यों को पूरा करना होगा। राज्य शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सितंबर के बाद किसी प्रकार की समयवृद्धि नहीं होगी। कार्य पूर्ण नहीं होने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी तय होगी।
प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की शुरुआत 25 जून 2015 से हुई थी। योजना के तहत आवास निर्माण के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। प्रदेश में स्वीकृत 2,06,118 आवासों में से 1,91,819 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि करीब 14 हजार आवास अब भी लंबित हैं। इसमें 14 नगर निगमों के 2,671, 55 नगर पालिकाओं के 5,607 और 97 नगर पंचायतों के 5,886 आवास शामिल हैं।
वहीं, धमतरी, रिसाली, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायपुर और भिलाई में एएचपी (किफायती आवास में साझेदारी) घटक के तहत स्वीकृत 1,200 से अधिक आवासों की केवल नींव और आधार संरचना ही तैयार हो पाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए राज्य और केंद्र सरकार निजी और सार्वजनिक एजेंसियों के साथ साझेदारी में घर बनाती हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के कार्यों की प्रगति की लगातार समीक्षा की जा रही है। चार जून को मुख्य सचिव विकासशील ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 और 2.0 के कार्यों की जानकारी नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से ली थी। पांच जून को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर ने अधिकारियों के साथ योजना के प्रगति की समीक्षा की थी।
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सभी निकायों को निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यों के प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। - शंगीता आर, सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग