• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • रक्षाबंधन
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

रायपुर एयरपोर्ट समेत देश के 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पांच समूहों में 50 वर्ष की लीज

रायपुर, भुवनेश्वर, वाराणसी और तिरुपति समेत देश के 11 हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है।

By Manish MishraEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 26 Aug 2026 12:30:09 PM (IST)Updated Date: Wed, 26 Aug 2026 12:31:45 PM (IST)
रायपुर एयरपोर्ट समेत देश के 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पांच समूहों में 50 वर्ष की लीज
स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा। फोटो सौजन्य सोशल मीडिया।

HighLights

  1. चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया
  2. समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है
  3. प्रत्येक समूह के सभी हवाई अड्डों का संचालन एक ही कंपनी करेगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर, भुवनेश्वर, वाराणसी और तिरुपति समेत देश के 11 हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। नागर विमानन मंत्रालय ने इन्हें पांच समूहों में बांटकर 50 वर्ष के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव रखा है।

प्रत्येक समूह के सभी हवाई अड्डों का संचालन एक ही कंपनी करेगी। पीपीपी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) ने चार अगस्त की बैठक में प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है

सरकार का लक्ष्य निजी भागीदारी से हवाई अड्डों का विकास और संचालन बेहतर करना है। समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है। रायपुर और औरंगाबाद, जबकि भुवनेश्वर और हुबली को अलग-अलग समूहों में शामिल किया गया है।


निजी संचालकों से कुल 8,622 करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद है। बाजार में केंद्रीकरण और अत्यधिक कर्ज के जोखिम को देखते हुए एक बोलीदाता के लिए समूहों की संख्या सीमित की जाएगी।

ऐसे बनाए गए पांच समूह

अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल को पहले, वाराणसी, गया और कुशीनगर दूसरे, भुवनेश्वर और हुबली को तीसरे, रायपुर और औरंगाबाद को चौथे और तिरुचिरापल्ली और तिरुपति को पांचवें समूह में रखा गया है।

कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष की व्यवस्था

हवाई अड्डों के निजीकरण के बाद एएआई के कर्मचारियों को लेकर भी व्यवस्था प्रस्तावित है। मंत्रालय ने निजी संचालक के साथ एक वर्ष की संयुक्त प्रबंधन अवधि रखने का सुझाव दिया है। इसके बाद परिचालक कंपनी को तीन वर्ष तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखना होगा।

चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया

सरकार के अनुसार, पिछले अनुभवों में ऐसी व्यवस्था कर्मचारियों को स्वीकार्य रही है। मौजूदा दौर के लिए 11 हवाई अड्डों का चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया। पहले 12 बड़े हवाई अड्डों का यात्री यातायात, भूमि, व्यावसायिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर आकलन किया गया। इसके बाद 136 छोटे हवाई अड्डों को बड़े हवाई अड्डों के साथ समूह बनाने की संभावना पर परखा गया।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में पेंशनरों के महंगाई राहत में वृद्धि, 55% और 252% की दर से मिलेगा डीआर, 1 जनवरी 2026 से मिलेगा लाभ