नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राज्य बनने के बाद पहली बार प्रदेश में ऐसे हालात बन रहे हैं, जब नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के गोदाम खाली होने की कगार पर पहुंच गए हैं। राजधानी समेत कई जिलों में चावल का स्टॉक बेहद कम रह गया है।
अगर 31 जनवरी तक गोदामों में पर्याप्त चावल नहीं पहुंचा, तो एक फरवरी से राज्य के 82.34 लाख राशन कार्डों से जुड़े करीब 2.73 करोड़ लोगों को राशन मिलने में भारी दिक्कत हो सकती है।
नान गोदामों में हालात चिंताजनक
इस संकट का सीधा असर बीपीएल परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए राशन ही जीवन की बुनियादी जरूरत है। राजधानी के गुढ़ियारी और मंदिर हसौद स्थित नान गोदामों में हालात चिंताजनक हैं। सूत्रों के अनुसार चालू माह में करीब 27 हजार क्विंटल चावल की जरूरत है, जबकि गोदामों में सिर्फ सात हजार क्विंटल स्टाक बचा है।
इसी का नतीजा है कि शहर की दर्जनों उचित मूल्य दुकानों में बीपीएल कोटे का चावल खत्म हो चुका है। कई दुकानों पर हितग्राही सुबह से लाइन में लगकर लौट रहे हैं, लेकिन चावल नहीं मिल पा रहा। दुकान संचालकों का कहना है कि कई दिन पहले नान में डिमांड भेजी जा चुकी है, इसके बावजूद भंडारण नहीं कराया जा रहा।
राशन नहीं, जवाब भी नहीं
राशन दुकानों पर पहुंच रहे हितग्राही अफसरों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। कहीं बीपीएल, तो कहीं एपीएल चावल गायब है। रायपुर जिले में 718 से अधिक उचित मूल्य की दुकानें हैं, लेकिन नागरिक आपूर्ति व्यवस्था को अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चलाया जा रहा है।
महीने के अंत का दबाव, समय कम
दुकान संचालकों का कहना है कि चालू माह समाप्त होने में अब सिर्फ नौ दिन बचे हैं, जिनमें से दो दिन अवकाश के होंगे। यदि समय रहते गोदामों में चावल का भंडारण नहीं हुआ, तो कई बीपीएल परिवार इस पूरे महीने चावल से वंचित रह जाएंगे, क्योंकि माह समाप्त होने के बाद सॉफ्टवेयर में उस महीने का राशन वितरण करने का विकल्प ही नहीं रहता।
गोदामों में कमी, सप्लाई पर असर
विभागीय सूत्रों के अनुसार चालू महीने में लगभग 20 से 27 हजार क्विंटल बीपीएल चावल का वितरण किया जाना है, लेकिन नान के गुढ़ियारी और मंदिर हसौद गोदामों में स्टॉक बेहद कम होने के कारण राशन दुकानों में भंडारण नहीं कराया जा रहा। स्थिति यह है कि खपत के अनुपात में गोदामों में चावल ही उपलब्ध नहीं है।
अतिरिक्त प्रभार बड़ी वजह
राजधानी होने के बावजूद रायपुर जिले की नागरिक आपूर्ति व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रही है। जिले में 718 से अधिक उचित मूल्य की दुकानें हैं, इसके बाद भी पर्याप्त अधिकारियों की तैनाती नहीं है। सूत्र बताते हैं कि अफसरों को अन्य जिलों का भी प्रभार सौंपा गया है।
जिले का दायरा बड़ा होने के कारण अधिकारी मैदानी स्तर तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे, जिससे निगरानी कमजोर हो रही है और लापरवाही बढ़ रही है।
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गोदामों में जल्द से जल्द भंडारण करने के लिए नागरिक आपूर्ति के जिला प्रबंधक को निर्देशित किया गया है। विलंब किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। विलंब पर कार्रवाई की जाएगी।
- कीर्तिमान सिंह राठौर, अपर कलेक्टर, रायपुर