
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बाघों के शिकार का मामला उठाया गया। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार के बढ़ते मामलों पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने ध्यानाकर्षण किया। इसका जवाब देते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक राज्य में कुल पांच मामलों में बाघों की छह खाल बरामद की गई है। अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि मारे गए बाघ ITR के हैं या कहीं और के।
नेता प्रतिपक्ष ने मामले में एक आईबी जवान के नाम का उल्लेख करते हुए पूछा कि उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और क्या इसमें कोई राजनीतिक सिंडिकेट शामिल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वन्यजीवों के शिकार और तस्करी की चेतावनी मिलने के बाद भी गश्त नहीं बढ़ाई गई।
जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार किसी का नाम छिपाने का प्रयास नहीं कर रही है और प्रशासन पूरी तत्परता से दोषियों पर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कैमरा खराब या बंद नहीं था, और रिजर्व में 126 कैमरे सक्रिय हैं। सरकार पूरी तत्परता से कार्रवाई कर रही है। बारिश के बावजूद गांव में घर-घर जाकर तलाशी ली गई। आरोपितों के पास एक खाल, चाकू व अन्य हथियार बरामद किया गया था।
उन्होंने बताया कि नवाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के माध्यम से अलर्ट किया गया था, जो एक सामान्य अलर्ट था। वह वह पूरे देश के सभी राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया जाता है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के लिए कोई विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया था।
कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी द्वारा पूछे गए सवालों पर मंत्री ने बताया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व पर प्रति वर्ष 10 करोड़ रुपये व्यय किए जाते हैं। 2022 की गणना के अनुसार यहां पांच बाघों की पुष्टि हुई थी। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि 2024 से अब तक पांच मामलों में कुल छह बाघों की खाल बरामद की गई है, हालांकि ये खालें इंद्रावती की ही हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी की जानी बाकी है।