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छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की महंगाई राहत में बाधा बनी इस धारा को हटाने का संकल्प पारित करे राज्य सरकार, पेंशनर महासंघ की मांग

भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ ने मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा-49 को हटाने की मांग की है। प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव के अनुसार, यह धारा मह...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 10:48:39 AM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 10:53:57 AM (IST)
छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों  की महंगाई राहत में बाधा बनी इस धारा को हटाने का संकल्प पारित करे राज्य सरकार, पेंशनर महासंघ की मांग
महंगाई भत्ते की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

HighLights

  1. पेंशनरों की महंगाई राहत में धारा-49 बनी बाधा
  2. पेंशन महासंघ की सरकार से धारा हटाने की मांग
  3. जनवरी 2026 से डीए-डीआर की स्वीकृति की अपील

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के पेंशनरों की वर्षों पुरानी मांग फिर से सुर्खियों में है। भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि आगामी मानसून सत्र में कैबिनेट से शासकीय संकल्प पारित किया जाए। इस संकल्प का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा-49 को विलोपित (हटाना) करना हो।

पेंशनरों का मानना है कि यह धारा उनके अधिकारों में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है।पिछले 25 वर्षों से यह धारा महंगाई राहत (DR) के भुगतान में कानूनी पेच फंसा रही है। इस धारा के कारण पेंशनरों को समय पर केंद्र के समान महंगाई राहत का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।


विसंगतियां दूर करने के लिए जरूरी है

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह अधिनियम नहीं हटेगा, तब तक पेंशनरों की विसंगतियां दूर नहीं हो सकेंगी।इसके साथ ही, महासंघ ने कैबिनेट से यह भी मांग की है कि जनवरी 2026 से केंद्र सरकार की तर्ज पर कर्मचारियों और पेंशनरों को दो प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) प्रदान करने का निर्णय लिया जाए। इस संबंध में उन्होंने अपनी विस्तृत मांगें सरकार को सौंपी हैं।

केंद्र के समान मिले सम्मानजनक राहत

पेंशनरों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के दौर में उन्हें भी केंद्र सरकार की तरह सम्मानजनक राहत मिलनी चाहिए। अब देखना यह है कि क्या आठ जुलाई को होने वाली कैबिनेट बैठक में सरकार इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय ले पाती है। पेंशनर्स पूरी तरह से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वर्षों पुरानी यह अड़चन अब दूर हो जाएगी।

एमपी छत्तीसगढ़ के 5.5 लाख से ज्यादा पेंशनर व परिवार जुड़े

नामदेव ने कहा कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साढ़े पांच लाख से अधिक पेंशनर एवं परिवार पेंशनर पिछले 25 वर्षों से इस व्यवस्था के कारण आर्थिक नुकसान और असमानता का सामना कर रहे हैं। इसलिए अब समय आ गया है कि दोनों राज्य सरकारें इस विषय पर ठोस पहल करें।