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सूरजपुर में शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: 92 और कर्मचारियों का संलग्नीकरण खत्म, अब स्कूलों में होगी असली परीक्षा

सूरजपुर जिले में शिक्षा विभाग ने 'नईदुनिया' की खबरों पर संज्ञान लेते हुए दूसरे चरण में 92 और शिक्षकों व कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर दिया है। इ...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 09:17:08 AM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2026 09:17:08 AM (IST)
सूरजपुर में शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: 92 और कर्मचारियों का संलग्नीकरण खत्म, अब स्कूलों में होगी असली परीक्षा
सयुक्त जिला कार्यालय, सूरजपुर

HighLights

  1. 'नईदुनिया' की खबर का बड़ा असर।
  2. कागजों से बाहर निकलकर मैदान में उतरे शिक्षक।
  3. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद।

नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर : जिले के सरकारी स्कूलों में वर्षों से चली आ रही संलग्नीकरण व्यवस्था पर अब शिक्षा विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। नईदुनिया द्वारा सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी, जबकि बड़ी संख्या में उनके कार्यालयों व अन्य संस्थानों में संलग्न रहने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विभाग ने दूसरे चरण में 92 शिक्षक एवं विद्यालयों से जुड़े अन्य कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 127 कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त किया जा चुका है। लगातार हो रही यह कार्रवाई जिले की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक शिकायत करते रहे कि सरकारी रिकॉर्ड में स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ दर्ज है, लेकिन हकीकत में कक्षाएं सीमित शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रही हैं। कई विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित रही तो कहीं कार्यालयीन कार्य भी बाधित होते रहे। इससे सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई को उठाना पड़ा।


नईदुनिया ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में जाकर ऐसे विद्यालयों की जमीनी स्थिति उजागर की थी, जहां पद स्वीकृत होने और कर्मचारियों की पदस्थापना के बावजूद वे अन्य कार्यालयों, संकुलों या संस्थानों में संलग्न थे। लगातार प्रकाशित खबरों के बाद शिक्षा विभाग ने संलग्नीकरण समाप्त करने की प्रक्रिया तेज करते हुए चरणबद्ध कार्रवाई शुरू की, जिसका असर अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है।

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हालांकि विभागीय कार्रवाई के बावजूद कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।

अपुष्ट सूत्रों के अनुसार प्रेमनगर सहित कुछ विकासखंडों में कुछ व्याख्याता और अन्य कर्मचारी अब तक अपने मूल विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं। जिला मुख्यालय में रहकर कार्य करने तथा वहीं से वेतन आहरण किए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। यदि इन तथ्यों की पुष्टि होती है तो यह स्पष्ट होगा कि आदेश जारी होने के बाद भी उनके पालन की निगरानी उतनी ही जरूरी है।

अब जिलेभर के अभिभावकों, ग्रामीणों और शिक्षा जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नियम लागू होंगे या कुछ लोगों को पहले की तरह विशेष छूट मिलती रहेगी। यदि विभाग बिना किसी भेदभाव के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करता है, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था मजबूत होगी और हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

फिलहाल, संलग्नीकरण समाप्त करने के आदेशों के बाद अब असली परीक्षा विभाग की नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों की है, जिन्हें अपने मूल विद्यालयों में लौटकर यह साबित करना होगा कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी केवल आदेशों से नहीं, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति और कार्य से पूरी होगी।