
कपिल नीले, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन में गड़बड़ी सामने आने के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय थोड़ा सर्तक हो गई है। जून से शुरू होने वाली ऑनलाइन कॉपी जांचने की व्यवस्था को कुछ महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। एजेंसी के चयन को लेकर सावधानी बरती जा रही है। यही वजह है कि अभी तक एजेंसी को फाइनल नहीं किया गया है।
दो दिन पहले भी सरकारी आइटी कंपनी को प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया था, मगर कुलगुरु डा. राकेश सिंघई ने अगले सप्ताह फिर कंपनी को प्रक्रिया को विस्तार से बताने को लेकर निर्देश दिए है। इस दौरान कुछ मूल्यांकनकर्ताओं भी मौजूद होंगे, जो कापी जांचने में आने वाली दिक्कतों के बारे में बताएंगे। उधर विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक व्यवस्था को लागू करने से पहले शिक्षकों को ट्रैनिंग दी जाएगी। ताकि भविष्य में आनलाइन मूल्यांकन पर सवाल न खड़े हो सके।
ह महीने से विश्वविद्यालय आनलाइन मूल्यांकन को लेकर कवायद करने में लगा है। शुरूआत एमबीए सेकंड सेमेस्टर की कापियां जांचने से होना थी, लेकिन अब व्यवस्था को अगले छह महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। ऑनलाइन मूल्यांकन को लेकर तीन कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी, जिसमें एमपी ऑनलाइन, एमपीकॉम और एपिटको शामिल है।
खास बात यह है कि विश्वविद्यालय ने आनलाइन मूल्यांकन के लिए सिर्फ सरकारी कंपनियों को बुलाया है। उसमें भी उन कंपनियों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्होंने मध्य प्रदेश में पहले भी काम कर रखा है। तीनों कंपनियों के प्रेजेंटेशन हो चुके है, जिसमें एमपीकाम की सेवाओं पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक अभी एजेंसी का चयन नहीं किया है, क्योंकि एक चरण का प्रेजेंटेशन होना बाकी है। 20 जून को कंपनी दोबारा कुलगुरु डा. सिंघई के सामने व्यवस्था के बारे में समझाएंगी।
आनलाइन मूल्यांकन की व्यवस्था में विश्वविद्यालय ने मामूली बदलाव किया है। मुख्य परीक्षा की कापियां जांचने के अलावा रिव्यू की व्यवस्था भी रखी है। इसके लिए एजेंसी को उत्तरपुस्तिका स्कैन कर विद्यार्थियों को भेजना है। यहां तक कि छात्र-छात्राओं की आपत्तियां भी आनलाइन मांगवाई जाएगी। उसके आधार पर रिव्यू के अंतर्गत एजेंसी को मूल्यांकन करना होगा।
आनलाइन मूल्यांकन व्यवस्था में एक ओर शर्त जोड़ी गई है, जिसमें एजेंसी को सर्वर डीएवीवी कैम्पस में रखना होगा। ऐसा करने के पीछे विश्वविद्यालय की मंशा यह है कि विद्यार्थियों से जुड़ा डेटा बाहर न जा सके। यहां तक कि विश्वविद्यालय की गोपनीयता भी बनी रहे।
आनलाइन मूल्यांकन अभी शुरू नहीं किया जा रहा है। उसमें थोड़ा समय लग रहा है। व्यवस्था लागू होने से पहले शिक्षकों की ट्रैनिंग करवाई जाएगी। यह काम भी एजेंसी अपने स्तर पर करेंगे। इसके चलते दिसंबर में होने वाली परीक्षाओं से आनलाइन कापियां जांचेंगे। -डा. अशेष तिवारी, परीक्षा नियंत्रक, डीएवीवी
शर्तों को पूरा करने वाली एजेंसी का चयन किया जाएगा, क्योंकि जांचने की प्रक्रिया को पारदर्शी रखेंगे। गोपनीय व्यवस्था होने के चलते एजेंसी को लेकर सावधानी बरती जा रही है। -प्रज्वल खरे, कुलसचिव, डीएवीवी