MP School Olympiad: प्राथमिक कक्षाएं बाहर, अब केवल 6वीं से 8वीं के छात्र लेंगे हिस्सा; जानें फैसले के पीछे की वजह
राज्य शिक्षा केंद्र के इस नए निर्णय से जिले के सैकड़ों प्राथमिक विद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं में भारी निराशा है।
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 04:53:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 04:57:30 PM (IST)
HighLights
- केवल कक्षा 6 से 8 के लिए परीक्षा
- FLN पर फोकस और OMR की जटिलता
- प्रतिभा प्रदर्शन से वंचित रहेंगे बच्चे
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों की शैक्षणिक दक्षता सुधारने और उनमें प्रतिस्पर्धी भावना विकसित करने के उद्देश्य से हर साल आयोजित होने वाली स्कूल ओलंपियाड परीक्षा के नियमों में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने इस बार ओलंपियाड परीक्षा का दायरा सीमित करते हुए प्राथमिक कक्षाओं कक्षा 2 से 5 के विद्यार्थियों को इससे बाहर कर दिया है।
अब इस परीक्षा में केवल माध्यमिक कक्षाओं यानी कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राएं ही भाग ले सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र के इस नए निर्णय से जिले के सैकड़ों प्राथमिक विद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं में भारी निराशा है।
क्यों लिया गया प्राथमिक कक्षाओं को हटाने का फैसला
- प्रशासनिक और शैक्षणिक सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक स्तर के बच्चों को ओलंपियाड से बाहर रखने के पीछे मुख्य रूप से बुनियादी साक्षरता और प्रशासनिक चुनौतियां वजह बनी हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस उम्र में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का दबाव बनाने के बजाय बच्चों की नींव मजबूत करना अधिक आवश्यक है।
प्राथमिक स्तर के छोटे बच्चों के लिए ओएमआर शीट पर रोल नंबर और विकल्प भरना काफी जटिल साबित हो रहा था, जिससे कई बार योग्य बच्चे भी तकनीकी गलती के कारण पिछड़ जाते थे।
जिला व राज्य स्तर पर विशाल संख्या में प्राथमिक स्तर के उत्तर-पत्रकों के मूल्यांकन और परीक्षा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए इसे फिलहाल मिडिल स्तर तक ही सीमित रखने का नीतिगत निर्णय लिया गया है। पुरस्कारों से वंचित रहेंगे छोटे मेधावी
ओलंपियाड परीक्षा में गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों से जुड़े बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। जनशिक्षा केंद्र से लेकर जिला व राज्य स्तर तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मेडल और प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
शिक्षकों का कहना है कि ओलंपियाड के माध्यम से गांव व शहरों के छोटे बच्चों में भी आगे बढ़ने की ललक पैदा होती थी। हालांकि, अब इस फैसले के बाद केवल कक्षा छह से आठ के छात्र ही जिला व राज्य स्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।
स्कूल ओलंपियाड की परीक्षा में इस बार कक्षा छह से आठ तक के ही छात्र भाग लेंगे। यह निर्णय राज्य शिक्षा केंद्र का है। हालांकि इसके कारण उन्हें नहीं बताए गए हैं। स्कूल आलंपियाड के लिए स्कूलों से रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। - विजय शर्मा, एपीसी, जिला शिक्षा केंद्र ग्वालियर