नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नई पहल के तहत सत्र 2026-27 से कक्षा तीसरी से आठवीं तक ‘सहायक वाचन’ को फिर से लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिये बच्चों को तीज-त्योहार, लोक परंपराएं और महापुरुषों के जीवन से रूबरू कराया जाएगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार सामग्री को अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, खानपान, लोक कला और परंपराओं को शामिल किया गया है।
महापुरुषों के प्रेरक प्रसंगों को स्थान दिया गया
नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा तीसरी में हरेली पर्व, चौथी में तीजा-पोरा, छठवीं में दक्षिण कौशल क्षेत्र और कपिलेश्वर मंदिर का इतिहास पढ़ाया जाएगा। सातवीं में करमा और सरहुल जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल होंगे। वहीं आठवीं में स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों के प्रेरक प्रसंगों को स्थान दिया गया है।
पाठ्यक्रम में स्वामी विवेकानंद, बिरसा मुंडा, चंद्रशेखर आजाद और पं. दीनदयाल उपाध्याय जैसे व्यक्तित्व को शामिल किया गया है।
तीजा पोरा लोक पर्वों के बारे में पढ़ेंगे
कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों को हरेली पर्व के महत्व और उससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी जाएगी। वहीं चौथी कक्षा के बच्चे तीजा-पोरा जैसे प्रमुख लोक पर्वों के बारे में पढ़ेंगे। छठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में दक्षिण कौशल क्षेत्र और बालोद स्थित कपिलेश्वर मंदिर का इतिहास शामिल किया गया है।
करमा और सरहुल जैसे पारंपरिक नृत्यों से परिचित होंगे
इसी तरह सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों को करमा और सरहुल जैसे पारंपरिक नृत्यों से परिचित कराया जाएगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की विविध प्रकार की पारंपरिक भाजियों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
सहायक वाचन में विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के जीवन और उनके योगदान से भी परिचित कराया जाएगा। इनमें स्वामी विवेकानंद, ठाकुर प्यारेलाल, विनोबा भावे, बिरसा मुंडा, चंद्रशेखर आजाद, गेंद सिंह, श्याम प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय जैसे महान व्यक्तित्व शामिल हैं।