ग्वालियर में सरकारी स्कूलों की बदहाली पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त, अध्यक्ष बोलीं-हालात बेहद खराब, स्कूलों में मिलीं शराब की बोतलें
कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में डॉ. निवेदिता शर्मा ने निर्देश दिए कि हर पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त किए जाएं। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 01:27:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 01:29:39 PM (IST)
बैठक में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा व अन्य। नईदुनियाHighLights
- डॉ. निवेदिता शर्मा पहुंची थीं बन्हेरी व बागवई
- थानों में बाल कल्याण अधिकारी की मांग
- बाल अधिकारों पर पुलिस का सुस्त रवैया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में सोमवार को सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ियों की बदहाल व्यवस्था को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने गहरी चिंता जताई है। यहां ग्वालियर आगमन पर जब उन्होंने बन्हेरी सरकारी स्कूल में जायजा लिया तो पाया कि स्कूल की बाउंड्रीवाल ही नहीं थी और बच्चियों के लिए जो टायलेट है वह सुरक्षित नहीं न चालू हालत में मिला। खराब टायलेट के कारण बच्चियां पांच-पांच दिन स्कूल नहीं आती हैं, टायलेट में खिड़कियों से लोग आपत्तिजनक सामग्री तक फेंक जाते हैं। टायलेट के पास शराब की बोतलें तक पड़ी मिलीं।
कलेक्ट्रेट में हुई बहुविभागीय बैठक में उन्होंने ग्रामीण इलाकों के स्कूलों और आंगनबाड़ियों की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की। वहीं बाल अधिकारों पर पुलिस का गैर जिम्मेदार रवैया भी सामने आया।
बाल कल्याण अधिकारी किए जाएं नियुक्त
कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में डॉ. निवेदिता शर्मा ने निर्देश दिए कि हर पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त किए जाएं। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी दिलाएं, जिससे वे पाक्सो एक्ट सहित अन्य प्रावधानों के तहत बाल अधिकार संरक्षण में मदद कर सकें। उन्होंने जिला स्तरीय समन्वय बैठक में बाल अधिकारों, बाल संरक्षण व्यवस्थाओं एवं शासकीय व अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा की।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यगण, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यगण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवेश बघेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास उपासना राय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. एमएस सागर सहित स्कूल शिक्षा, सामाजिक न्याय व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
बाल अधिकारों पर 'बेपरवाह' पुलिस, जेजेबी-सीडब्ल्यूसी ने रखे मुद्दे
बाल अधिकारियों को लेकर पुलिस का रवैया जिम्मेदाराना नहीं है। अपराध यदि कोई बच्चा पकड़ा जाता है तो पुलिस तत्काल उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश नहीं करती है, उसे दो से तीन दिन तक थाने में ही रखा जाता है जबकि यह नियम के खिलाफ है। कई बार किशोर न्याय बोर्ड की ओर से पुलिस को पत्र भी जारी किए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के सामने ही बच्चे भीख मांगते हैं, उन्हें पुलिस द्वारा रोका टोका जा सकता है।
पालन करने में पुलिस कमजोर
पुलिस थानों में बाल कल्याण अधिकारी बदल जाते हैं, जो मौजूद होते हैं उन्हें कानून की जानकारी पूरी नहीं होती है, वे बाल कल्याण समिति वालों से फोन करके पूछते हैं। विधि विवादित बच्चों को संवेदनशील ढंग से डील करना होता है उनके सामने वर्दी भी नहीं पहनी जाना चाहिए लेकिन पुलिस इसका पालन नहीं कर पाती है।
बाल कल्याण अधिकारी जो ट्रेनिंग लेकर बनता है कुछ समय बाद उसका तबादला हो जाता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के पास बाल कल्याण अधिकारियों की सूची नहीं है। जिले में पुलिस की विशेष किशोर पुलिस इकाई भी पूरी तरह सक्रिय नहीं है इसे प्रभावी होने की जरूरत है।
बाल अधिकारों को लेकर यह मुद्दे सोमवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डा. निवेदिता शर्मा के सामने आए, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सहित महिला बाल विकास अधिकारियों ने यह समस्याएं रखीं।