
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) अगस्त में सहायक प्राध्यपक (हिन्दी) के रिक्त पदों को लेकर साक्षात्कार करवाने जा रहा है। मगर उसके पहले कुछ उम्मीदवारों को अपात्र कर दिया है, क्योंकि अधिसूचना में एमए हिन्दी की योग्यता रखी गई थी। मगर इन उम्मीदवारों ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से एमए व्यवहारिक हिन्दी अनुवाद व साहित्य की डिग्री प्राप्त की है।
डिग्री का टाइटल दूसरा होने के चलते उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। अब इन उम्मीदवारों ने विश्वविद्यालय से डिग्री टाइटल को अधिसूचना में जुड़वावे के लिए गुहार लगाई है। मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजने का आश्वासन दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कालेजों में रिक्त सहायक प्राध्यापक हिन्दी विषय के पद निकाले थे। अब आयोग ने सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2024 हिन्दी की अंतिम चयन प्रक्रिया रखी है। इसके लिए उम्मीदवारों के आवेदन अप्रैल में मांगवाए थे। आयोग की समिति ने आवेदनों की स्क्रूटनी की, जिसमें चार उम्मीदवारों को इसलिए प्रक्रिया से बाहर कर दिया है, क्योंकि अधिसूचना में एमए हिन्दी साहित्य की डिग्री अनिवार्य की है।
मगर भले ही उम्मीदवारों ने एमए कर रखा है, लेकिन उनकी डिग्री का टाइटल भर्ती प्रक्रिया से मिलान नहीं कर रहा है। उम्मीदवारों ने विश्वविद्यालय के तुलनात्मक भाषा अध्ययनशाला से एमए व्यवहारिक हिन्दी अनुवाद और साहित्य की डिग्री प्राप्त कर रखी है। उम्मीदवारों ने शुक्रवार को डिग्री का टाइटल में बदलाव पर जोर दिया है। उनका कहना है कि आयोग की तरफ से जो अधिसूचना निकाली गई है। उसमें सिर्फ एमए हिन्दी के बारे में उल्लेख किया है। उसमें सब विषय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके चलते आयोग ने कुछ उम्मीदवारों को अपात्र घोषित कर दिया है।
उम्मीदवारों ने परीक्षा नियंत्रक डा. अशेष तिवारी से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि एमए हिन्दी और एमए व्यवहारिक हिन्दी अनुवाद व साहित्य का सिलेबस एक सामान है। चूंकि यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के अध्ययनशाला से संचालित होता है। बकायदा यह सेल्फ फाइनेंस कोर्स है। वे कहते है कि उम्मीदवारों ने अपनी पीड़ा बताई है। अब उच्च शिक्षा विभाग को डीएवीवी के पाठ्यक्रम के सिलेबस सहित अन्य जरूरी दस्तावेज भेजे जाएंगे। साथ ही इन्हें एमए हिन्दी के साथ ही विकल्पिक विषय के बारे में उल्लेख करने को कहा जाएगा। ताकि ये उम्मीदवार साक्षात्कार की प्रक्रिया में शामिल हो सके।
उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का बढ़ा क्रेज, बना नया रिकॉर्ड