
UPSC Success Stories: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम केवल अंकों की सूची नहीं, बल्कि संघर्ष और अटूट हौसले का दस्तावेज है। इस साल के परिणामों में कई ऐसी कहानियां सामने आई हैं, जो साबित करती हैं कि सफलता के लिए सुविधाओं से ज्यादा संकल्प की आवश्यकता होती है।
आइए जानते हैं उन सितारों के बारे में जिन्होंने गरीबी और विपरीत परिस्थितियों को हराकर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिखवाया।
किशनगंज की जूही दास की कहानी सबसे भावुक करने वाली है। यूपीएससी इंटरव्यू से महज 10 दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया। जिस दिन घर में पिता की 13वीं (श्राद्ध) थी, उसी दिन जूही ने अपने आंसुओं को पोंछकर इंटरव्यू देने का साहस दिखाया। जूही ने न केवल अपनी मां का 30 साल पुराना सपना पूरा किया, बल्कि बहादुरी की एक नई मिसाल पेश की।
अनुज अग्निहोत्री ने अपने तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर इतिहास रच दिया। पहले प्रयास में उनका चयन DANICS में हुआ था। ट्रेनिंग के दौरान समय निकालकर वह रोजाना 5-6 घंटे पढ़ते थे। दूसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन चयन नहीं हुआ। हार न मानते हुए उन्होंने तैयारी जारी रखी और अंततः टॉप किया।
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मुजफ्फरपुर के राघव झुनझुनवाला ने UPSC में चौथी रैंक हासिल की है। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद राघव का पालन-पोषण उनके नाना के घर हुआ। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे प्रयास में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।
नवादा (बिहार) के रवि राज ने 20वीं रैंक हासिल की है। बचपन में आंखों की रोशनी जाने के बावजूद रवि ने हार नहीं मानी। उनके पिता किसान हैं। रवि की सफलता में उनकी मां का बड़ा योगदान है, जो उन्हें किताबें पढ़कर सुनाती थीं और नोट्स बनाने में मदद करती थीं। रवि पहले से ही बीपीएससी में अधिकारी रहे हैं।
बुलंदशहर की शिखा गौतम ने 113वीं रैंक प्राप्त की है। शिखा के दादा चपरासी थे और पिता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। दिल्ली में रहकर रोजाना 16 घंटे की कठिन पढ़ाई और अटूट अनुशासन के बल पर शिखा ने यह मुकाम हासिल किया।
जोधपुर (राजस्थान) की अनीता देवड़ा ने 644वीं रैंक हासिल की है। अनीता की मां ने दिन-रात मजदूरी करके उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। आर्थिक तंगी के बीच अनीता ने बिना किसी महंगी कोचिंग के सेल्फ स्टडी के जरिए इस कठिन परीक्षा को पास किया।
संभल के देव डुडेजा ने 152वीं रैंक हासिल की है। देव के पिता कॉलेज के सामने चाय की दुकान चलाते हैं। साल 2024 में 327वीं रैंक लाकर वह IRS बने थे और वर्तमान में नागपुर में ट्रेनिंग ले रहे हैं, लेकिन अब वह आईपीएस के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे।
अंबेडकरनगर के विपिन देव यादव ने 316वीं रैंक हासिल की है। विपिन के पिता पेशे से चौकीदार हैं। विपिन ने अपनी तैयारी के दौरान कोचिंग में पढ़ाकर अपना खर्च निकाला और चौथे प्रयास में यह गौरव हासिल किया।
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