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नहीं रहे मध्यप्रदेश के मुश्ताक खान, मुंबई तक का सफर था संघर्ष से भरा; कभी स्टेशन पर सोए, फिर ‘वेलकम’ के बल्लू बनकर छा गए

मुश्ताक खान का 24 सितंबर 2026 को निधन हो गया। मध्य प्रदेश के बालाघाट से मुंबई पहुंचे मुश्ताक को शुरुआती दिनों में रहने का ठिकाना न होने के कारण रेलवे ...और पढ़ें

By Akriti kumariEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 11:46:51 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 11:46:51 PM (IST)
नहीं रहे मध्यप्रदेश के मुश्ताक खान, मुंबई तक का सफर था संघर्ष से भरा; कभी स्टेशन पर सोए, फिर ‘वेलकम’ के बल्लू बनकर छा गए
बालाघाट (मध्य प्रदेश) से निकलकर बॉलीवुड में पहचान बनाने वाले दिवंगत एक्टर मुश्ताक खान।

एंटरटेनमेंट डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश के बालाघाट से निकलकर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने वाले एक्टर मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं हैं। पर्दे पर अपने छोटे-छोटे लेकिन यादगार किरदारों से ऑडियंस को हंसाने वाले मुश्ताक ने कई साल तक फिल्मों और टीवी में काम किया। उनके निधन के बाद एक बार फिर उनके किरदारों के साथ उनकी संघर्ष की कहानी भी याद की जा रही है।

मुश्ताक खान की जिंदगी उन लोगों के लिए प्रेरणा रही, जो छोटे शहर से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। बैहर में शुरू हुआ एक्टिंग का शौक उन्हें मुंबई तक ले गया। वहां उनके पास न रहने की पक्की जगह थी, न ज्यादा पैसे और न ही काम की गारंटी। कई बार रेलवे स्टेशन और फुटपाथ पर रात गुजारनी पड़ी, लेकिन उन्होंने थिएटर और एक्टिंग का साथ नहीं छोड़ा।


बालाघाट के बैहर में शुरू हुआ एक्टिंग का शौक

मुश्ताक खान का मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर से खास रिश्ता रहा। बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का शौक था। स्कूल और कॉलेज के दिनों में वे नाटकों में हिस्सा लिया करते थे।

हालांकि, परिवार चाहता था कि वे घर के काम में हाथ बंटाएं और परिवार की जिम्मेदारियां संभालें। ऐसे समय में उनके बड़े भाई ने उनके सपने को समझा और उनका साथ दिया। यही हौसला लेकर मुश्ताक मुंबई पहुंच गए। लेकिन मायानगरी में उनका स्वागत किसी स्टार की तरह नहीं हुआ।

पैसे कम थे, रहने की जगह नहीं थी

मुंबई में शुरुआती दिन बेहद मुश्किल थे। पैसे कम थे और रहने की कोई स्थायी जगह नहीं थी। काम की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह भटकना पड़ता था। कई बार हालात ऐसे बने कि मुश्ताक को रेलवे स्टेशन और फुटपाथ पर रात गुजारनी पड़ी। ऑडिशन और काम के लिए उन्हें लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।

लेकिन इन मुश्किलों के बीच उन्होंने थिएटर करना जारी रखा। यही थिएटर उनके लिए एक्टिंग की ट्रेनिंग भी था और इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने का जरिया भी।

फोन तक नहीं था, किराने की दुकान पर करते थे इंतजार

स्ट्रगल के दिनों में मुश्ताक के पास अपना फोन तक नहीं था। अगर किसी फिल्ममेकर या प्रोडक्शन हाउस से काम के लिए फोन आने की उम्मीद होती तो वे पास की किराने की दुकान का नंबर दे देते थे। वे दुकानदार को पैसे देते और पूछते रहते कि उनके लिए कोई फोन आया या नहीं।

आज जिस दौर में एक फोन पर ऑडिशन और मीटिंग की जानकारी मिल जाती है, उस समय मुश्ताक के लिए एक फोन कॉल का इंतजार भी संघर्ष का हिस्सा था।

इस्माइल श्रॉफ की नजर पड़ी और मिला पहला मौका

थिएटर में काम करते हुए मशहूर फिल्ममेकर इस्माइल श्रॉफ की नजर मुश्ताक पर पड़ी। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘थोड़ी सी बेवफाई’ में एक्टिंग करने का मौका मिला। यह उनके फिल्मी सफर की शुरुआत थी। इसके बाद उनकी मुलाकात सलीम खान से हुई। सलीम खान उनके काम से परिचित थे और उन्होंने उन्हें फिल्ममेकर महेश भट्ट से मिलवाया।

इसके बाद मुश्ताक ने महेश भट्ट की फिल्मों में काम किया। ‘कब्जा’ समेत कई प्रोजेक्ट्स में नजर आने के बाद उनका नाम धीरे-धीरे इंडस्ट्री में पहचाना जाने लगा।

‘आशिकी’ और ‘सड़क’ जैसी फिल्मों का बने हिस्सा

1990 के दशक में मुश्ताक खान लगातार फिल्मों में नजर आने लगे। ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘सड़क’ जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया। उनकी खासियत यह थी कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। कभी पुलिसवाला बने, कभी दुकानदार, कभी कॉमेडी रोल किया तो कभी गंभीर किरदार निभाया। उन कलाकारों में शामिल होते गए, जिनका स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन पर्दे पर आते ही दर्शक उन्हें पहचान लेते थे।

‘वेलकम’ के बल्लू ने बना दिया यादगार

फिर आया साल 2007 और फिल्म ‘वेलकम’। इस फिल्म में मुश्ताक खान ने नाना पाटेकर के किरदार उदय शेट्टी के गुर्गे बल्लू की भूमिका निभाई। किरदार छोटा था, लेकिन मुश्ताक ने अपनी कॉमिक टाइमिंग और अंदाज से उसे यादगार बना दिया।

उनका डायलॉग- ‘मेरी एक टांग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था…’

आज भी ‘वेलकम’ के सबसे यादगार संवादों में गिना जाता है। सोशल मीडिया के दौर में भी इस डायलॉग और किरदार से जुड़े मीम्स लगातार दिखाई देते हैं।

छोटे शहर से निकले कलाकार ने बनाई अपनी जगह

मुश्ताक खान का सफर सिर्फ ‘वेलकम’ के बल्लू तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपने लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स में काम किया। ‘हेरा फेरी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वॉन्टेड’, ‘राउडी राठौर’, ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए। वे वेब सीरीज ‘द रेलवे मेन’ का भी हिस्सा रहे।

लेकिन उनके सफर की सबसे खास बात यह रही कि बालाघाट के बैहर से निकला एक लड़का बिना आसान रास्ते के मुंबई पहुंचा और धीरे-धीरे उसी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली, जहां शुरुआत में उसे काम तक नहीं मिलता था।

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