
लाइफस्टाइल डेस्क। यदि आप पारंपरिक पर्यटन स्थलों की भीड़भाड़ से ऊब चुके हैं और किसी ऐसी यात्रा पर निकलना चाहते हैं जहां रोमांच, अध्यात्म और कुदरत का जादुई तालमेल देखने को मिले, तो भारत के केंद्र में स्थित छत्तीसगढ़ राज्य आपका स्वागत करने के लिए तैयार है। घने जंगलों, प्राचीन जनजातीय लोक-कलाओं और अनसुलझे भौगोलिक रहस्यों से समृद्ध यह राज्य सैलानियों को एक बिल्कुल अलग दुनिया का अनुभव कराता है।
अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए आप छत्तीसगढ़ के इन पांच बेमिसाल पर्यटन स्थलों का रुख कर सकते हैं:
सरगुजा संभाग में पर्वतीय ऊंचाइयों पर बसा मैनपाट एक ऐसा हिल स्टेशन है, जिसे इसके ठंडे मिजाज के कारण 'छत्तीसगढ़ का शिमला' कहा जाता है। 1962 के दौर में यहां बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था, जिसकी वजह से आज भी इस पूरे इलाके में तिब्बती बौद्ध संस्कृति, खान-पान और प्रार्थना झंडों की गहरी छाप दिखती है, इसी कारण इसे 'छोटा तिब्बत' भी कहते हैं।
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मैनपाट सिर्फ अपनी वादियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अजूबों के लिए प्रसिद्ध है:

बस्तर अंचल में इंद्रावती नदी पर बनने वाला चित्रकोट जलप्रपात देश की प्राकृतिक संपदा का गौरव है। अपने घोड़े की नाल जैसे घुमावदार और बेहद चौड़े स्वरूप के कारण इसे 'भारत का नियाग्रा फॉल्स' का दर्जा मिला हुआ है। बारिश के दिनों में जब नदी अपने पूरे उफान पर होती है, तब इस झरने की दहाड़ और हवा में उड़ती पानी की बौछारें रोमांचित कर देती हैं। सबसे खूबसूरत नजारा सुबह और शाम के वक्त होता है, जब सूर्य की किरणें पानी के कणों से टकराकर खूबसूरत इंद्रधनुष बनाती हैं।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों के बीच जमीन के भीतर छिपी कुटुंबसर गुफाएं रोमांच के शौकीनों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं हैं। यह भारत की सबसे गहरी भूमिगत चूना-पत्थर (लाइमस्टोन) की गुफाओं में गिनी जाती है। गुफा के भीतर सदियों से सूर्य की एक भी किरण नहीं पहुंची है, जिसके चलते यहां मुकम्मल और गहरा अंधेरा पसरा रहता है। इसके अंदर पानी की बूंदों के जमने से बनीं प्राकृतिक कलाकृतियां (स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स) देखने को मिलती हैं। इस गुफा में बिना रोशनी और गाइड के जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

कबीरधाम जिले की सुरम्य मैकल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित भोरमदेव मंदिर इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए एक अमूल्य धरोहर है। 11वीं शताब्दी में फणि नागवंश के राजाओं द्वारा निर्मित यह देवालय भगवान शिव को समर्पित है। नागर शैली में बने इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर बेहद बारीक नक्काशी, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और कामुक मुद्राएं उकेरी गई हैं, जिसके कारण इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' भी कहा जाता है।
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बस्तर के प्राकृतिक आकर्षणों में तीरथगढ़ जलप्रपात का स्थान बेहद खास है। मुनगा बहार नदी पर स्थित इस झरने की विशेषता यह है कि इसका पानी किसी एक ऊंची ढलान से सीधे नीचे नहीं गिरता, बल्कि ग्रेनाइट की विशाल चट्टानों से बनी प्राकृतिक सीढ़ियों के चरणों को छूते हुए कई टुकड़ों में नीचे आता है। पहाड़ों से उतरती पानी की यह सफेद दूधिया चादर सैलानियों को पिकनिक मनाने और प्रकृति के बीच शांत पल बिताने के लिए सालभर आकर्षित करती है।