
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सांची के स्तूप, बांधवगढ़ के किले, मांडू की ऐतिहासिक इमारतें और ओरछा के विरासत स्थल देखने के लिए अब बच्चों को स्कूल से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपनी कक्षा में बैठे-बैठे ही वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए इन ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे।
पुरातत्व एवं अभिलेखागार विभाग (Department of Archaeology and Archives) ने सेवा पखवाड़े के तहत इस पहल की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन से शुरू होने वाली यह पहल दशहरा तक चलेगी। इस दौरान भोपाल के करीब 25 से 30 सरकारी स्कूलों को इससे जोड़ा जाएगा। हर दिन एक सरकारी स्कूल में टीम पहुंचेगी और स्टूडेंट्स को VR के जरिए प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का अनुभव कराया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स को VR हेडसेट पहनाया जाएगा। इसके जरिए उन्हें करीब 10 मिनट का वीडियो दिखाया जाएगा। वीडियो में ऐतिहासिक स्थलों को हाइपर-रियलिस्टिक दृश्यों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को ऐसा दृश्य अनुभव देना है, जैसे वे वास्तव में उस जगह पर मौजूद हों।
वे स्मारकों और उनके आसपास के विरासत स्थलों को अलग-अलग कोणों से देख सकेंगे। उनके इतिहास से जुड़ी जानकारी भी हासिल करेंगे।
इस VR अनुभव में स्टूडेंट्स को बांधवगढ़ किला, सांची स्तूप, मांडू स्मारक समूह और ओरछा समूह जैसे ऐतिहासिक स्थलों से परिचित कराया जाएगा। आमतौर पर बच्चे इन जगहों के बारे में इतिहास की किताबों में पढ़ते हैं, लेकिन VR तकनीक के जरिए उन्हें वही विरासत दृश्य रूप में देखने का मौका मिलेगा।
इस पहल के जरिए विभाग का प्रयास है कि इतिहास सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चे उसे देखकर और अनुभव करके समझें।
कार्यक्रम के तहत भोपाल के करीब 25 से 30 सरकारी स्कूलों में टीम जाकर स्टूडेंट्स को यह अनुभव कराएगी। इससे उन बच्चों को भी प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ने का मौका मिलेगा, जो किसी कारण से इन स्थलों की यात्रा नहीं कर पाते।
तकनीक के इस इस्तेमाल से स्टूडेंट्स में मध्य प्रदेश की विरासत को जानने और उसके संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें- धूप या स्मोकिंग की आदत... आपकी स्किन को कौन तेजी से बना रहा है बूढ़ा?