
दीप्ति मुले, जबलपुर। शहर की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है। अधारताल स्थित तालाब में इन दिनों एक खूबसूरत और आकर्षक पक्षी पर्पल स्वैम्पहेन नजर आया है। चमकीले नीले-बैंगनी रंग के शरीर, लाल चोंच और माथे पर बनी लाल ढाल जैसी संरचना वाले इस पक्षी ने तालाब के आसपास आने-जाने वाले लोगों और पक्षी प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। तालाब में इसकी मौजूदगी को शहर की समृद्ध पक्षी विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पर्पल स्वैम्पहेन को हिंदी में जलमुर्गी अथवा नीलकंठी जलमुर्गी के नाम से भी जाना जाता है। इसके लंबे लाल-गुलाबी पैर और चमकीला शरीर इसे दूसरे जल पक्षियों से अलग पहचान देते हैं। यह पक्षी तालाब, झील, दलदली क्षेत्र और ऐसे स्थानों पर पाया जाता है, जहां पानी के साथ जलीय वनस्पतियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। यह पानी के आसपास उगने वाली वनस्पतियों के बीच आसानी से विचरण करता दिखाई देता है।
पक्षी प्रेमियों के लिए अधारताल का यह नजारा इसलिए भी खास है, क्योंकि शहर के बीचोंबीच किसी खूबसूरत जल पक्षी का दिखाई देना यह बताता है कि जबलपुर की प्राकृतिक धरोहर अभी भी जीवंत है। जरूरत केवल इसे पहचानने, समझने और संरक्षित रखने की है।

पक्षी विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि शहर के तालाब केवल जल संग्रहण के स्थान नहीं हैं, बल्कि ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जलस्रोतों में स्वच्छ पानी, जलीय वनस्पतियां और आसपास हरियाली बनी रहे तो कई पक्षी प्रजातियां यहां अपना प्राकृतिक आवास बना सकती हैं।
अधारताल तालाब में पर्पल स्वैम्पहेन का दिखाई देना शहरवासियों के लिए प्रकृति को करीब से देखने का अवसर भी है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि जबलपुर की जैव विविधता को बचाने के लिए तालाबों और प्राकृतिक क्षेत्रों का संरक्षण जरूरी है। यदि जलस्रोतों में कचरा, प्लास्टिक और प्रदूषण कम किया जाए तथा आसपास की हरियाली को सुरक्षित रखा जाए, तो शहर में पक्षियों की कई और प्रजातियों को अनुकूल वातावरण मिल सकता है।