
लाइफस्टाइल डेस्क। खांसी को अक्सर हम सामान्य सर्दी-जुकाम का लक्षण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन खांसी अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है। जब श्वसन नली में धूल, धुआं, बलगम या किसी बाहरी कण से रुकावट आती है, तो फेफड़े उसे बाहर निकालने के लिए खांसने की प्रक्रिया अपनाते हैं। इसलिए बार-बार या लंबे समय तक खांसी आना किसी गंभीर कारण का संकेत भी हो सकता है।
खांसी के प्रमुख कारण कई हैं। सबसे सामान्य कारण वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, एलर्जी और धूल-धुएं के संपर्क में आना है। बदलते मौसम में यह खांसी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन यदि खांसी ज्यादा दिन तक रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार खांसी के पीछे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, गैस्ट्रिक रिफ्लक्स (एसिडिटी का गले तक आना), धूम्रपान, टीबी या फेफड़ों में संक्रमण जैसे कारण हो सकते हैं।
बच्चों में अक्सर टान्सिल या एडेनोइड बढ़ने से, तो बुजुर्गों में हृदय रोग या दवाओं के साइड इफेक्ट से भी खांसी देखी जाती है। डाॅ. विकास पटेल, छाती-श्वसन रोग विशेषज्ञ के अनुसार रात में बढ़ने वाली, सीटी जैसी आवाज वाली या बलगम-कफ वाली खांसी को विशेष रूप से गंभीरता से लेना चाहिए।
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यदि खांसी के साथ बुखार, वजन कम होना, खून आना, सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द हो, तो तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए। डाॅक्टर थ्रोट, चेस्ट एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, स्पुटम टेस्ट या जरूरत पड़ने पर पीएफटी जांच की सलाह दे सकते हैं।
बचाव के लिए धूल-धुएं से बचें, मास्क पहनें, पर्याप्त पानी पिएं, धूम्रपान से दूरी बनाएं और ठंडी चीजों का अधिक सेवन न करें। स्वयं दवा लेने के बजाय कारण जानकर इलाज कराना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। इसलिए बार-बार होने वाली खांसी को हल्के में न लें, एक बार पूरी जांच जरूर कराएं।