
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दिवाली पर घर सजाने का उत्साह अब बाजार से सामान खरीदने तक सीमित नहीं है। महिलाएं अपनी पसंद और कल्पनाशीलता के साथ घर के हर कोने को खास रूप देने में जुटी हैं। कोई फूलों से सजी थालियों में दीये रख रही है तो कोई गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियों से रंगोली और दीप सज्जा तैयार कर रही है। मुख्य द्वार, पूजा स्थल और बालकनी के लिए अलग-अलग थीम अपनाई जा रही हैं।
सजावट के नए विचारों के लिए महिलाएं सोशल मीडिया पर रील्स, दूसरे शहरों के डेकोरेशन पेज और वेबसाइट देख रही हैं। वहां से मिले आइडिया को अपनी पसंद और घर की जगह के अनुसार बदलकर नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इस बार फूलों की सजावट में कई तरह के प्रयोग नजर आ रहे हैं।

गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियों से थाली के चारों ओर डिजाइन बनाना, पीतल के दीपदान के नीचे फूलों की गोल आकृति सजाना और पानी से भरे बड़े बर्तनों में फूलों के साथ तैरते दीये रखना पसंद किया जा रहा है। रंगोली में भी पारंपरिक रंगों की जगह ताजे फूलों का इस्तेमाल हो रहा है। पूजा स्थल पर फूलों की पंखुड़ियों, पीतल के बर्तनों और कमल के आकार वाले दीपों का संयोजन भी किया जा रहा है।

हविषा गौर बताती हैं कि वे दिवाली की सजावट के लिए सोशल मीडिया पर अलग-अलग रील्स देखती हैं। कई बार किसी रील से मिला छोटा-सा विचार अपने घर के हिसाब से बेहतर बनाया जा सकता है। अलग-अलग पेज और जगहों के आइडिया मिलाकर नया प्रयोग करना उन्हें पसंद है। उनके अनुसार, सुंदर सजावट के लिए महंगे सामान की जरूरत नहीं होती। फूल, दीये, मोमबत्तियां और घर में मौजूद सजावटी वस्तुओं को नए तरीके से इस्तेमाल कर आकर्षक रूप दिया जा सकता है।
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अवनि घर के प्रवेश द्वार को खास अंदाज में सजाती हैं। दरवाजे के दोनों ओर गेंदे और अन्य फूलों की मालाएं लगाई जाती हैं, जिनके बीच छोटे दीये सजते हैं। फर्श पर फूलों से आकृतियां बनाकर उनके आसपास दीये रखे जाते हैं। पीले और नारंगी गेंदे के साथ सफेद फूलों का मेल प्रवेश द्वार को रंगीन बनाता है और घर में कदम रखते ही उत्सव का माहौल महसूस होता है।

रितु पटेल को फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाना, पीतल के दीपदान सजाना और दीयों की रोशनी से घर के कोनों को निखारना पसंद है। उनका कहना है कि थोड़ी रचनात्मकता और उपलब्ध सामान के सही इस्तेमाल से बिना अधिक खर्च किए घर को सुंदर बनाया जा सकता है।

महिलाएं तैयार सजावटी सामान खरीदने के साथ खुद भी नई चीजें बना रही हैं। पुरानी थालियों, पीतल के बर्तनों, कांच के कटोरों और मिट्टी के दीयों को फूलों, मोमबत्तियों और रंगों से नया रूप दिया जा रहा है। इस तरह हर घर की सजावट में व्यक्तिगत पसंद झलक रही है और दिवाली की रौनक के साथ महिलाओं की रचनात्मकता भी सामने आ रही है।
