नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे ध्रुवतारे थे, जिनका प्रकाश केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं रहा। वे राजनीति में शिखर पर पहुंचे तो साहित्य में भी अपनी अलग पहचान बनाई। कवि हृदय, संवेदनशील वक्ता, सामाजिक समरसता के पक्षधर और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध अटलजी का व्यक्तित्व इतना विराट था कि विरोधी भी उनके राजनीतिक कद का सम्मान करते थे। लेकिन इस विराट व्यक्तित्व के बीच ग्वालियर उनके लिए हमेशा आत्मीयता और अपनत्व का शहर रहा।
ग्वालियर की गलियों, चौक-चौराहों और साहित्यिक संस्थानों से अटलजी की ऐसी स्मृतियां जुड़ी हैं, जो आज भी शहर की सामूहिक चेतना का हिस्सा हैं। यही वह शहर था, जहां उन्होंने बचपन और युवावस्था के महत्वपूर्ण वर्ष बिताए, कविता लिखी, साहित्यिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और राजनीति की शुरुआती जमीन तैयार की। देश की राजनीति में उन्हें जो ऊंचाई मिली, उसकी नींव में ग्वालियर की मिट्टी का योगदान वे स्वयं स्वीकार करते रहे। आज यानी 16 अगस्त को अटलजी की पुण्यतिथि मनाई जाएगी।
उतार-चढ़ाव से भरा रहा राजनीतिक सफर
अटलजी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने अनेक चुनाव जीते तो पराजय भी देखी। 1984 के लोकसभा चुनाव में ग्वालियर से मिली हार उनके राजनीतिक जीवन का एक ऐसा प्रसंग थी, जिसे भुलाना आसान नहीं था। इसके बावजूद उनका ग्वालियर से रिश्ता कभी कमजोर नहीं हुआ। चुनावी परिणामों से परे शहर ने उन्हें अपने हृदय में स्थान दिया और अटलजी ने भी ग्वालियर को अपनी स्मृतियों में हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया। आज अटलजी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ग्वालियर में उनकी विरासत को जीवंत रखने के लिए कई प्रयास हुए हैं। उनके नाम पर बने शैक्षणिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थान नई पीढ़ी को उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से परिचित करा रहे हैं।
सिरोल की पहाड़ी पर आकार ले रहा अटल स्मारक
अटलजी की स्मृतियों को एक स्थान पर समेटने की दिशा में सिरोल पहाड़ी पर प्रस्तावित अटल स्मारक सबसे महत्वपूर्ण पहल है। करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित हो रहे इस स्मारक में अटलजी की प्रतिमा के साथ संग्रहालय, पुस्तकालय और अन्य सुविधाएं प्रस्तावित हैं। गौरव दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इसकी आधारशिला रखी थी।
यह स्मारक केवल एक प्रतिमा या भवन नहीं होगा, बल्कि अटलजी के जीवन, विचार, साहित्य और राजनीतिक यात्रा को समझने का केंद्र बनेगा। ग्वालियर आने वाले देश-विदेश के लोगों को यहां अटलजी के व्यक्तित्व और शहर से उनके रिश्ते को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। निर्माणाधीन इस स्मारक के अगले वर्ष तक पूर्ण होने की संभावना है।
हिंदी भवन में पूरा हो रहा सपना
26 दिसंबर 2004 को हिंदी साहित्य सभा के शताब्दी वर्ष समारोह में अटलजी ने अपने पुराने दिनों को याद किया था। उन्होंने दौलतगंज के भवन की घुमावदार सीढ़ियों और वहां बिताए समय का उल्लेख करते हुए ग्वालियर में हिंदी भवन बनाने का सपना सामने रखा था। वर्षों बाद अब यह सपना साकार होने की स्थिति में है। राज्य सरकार ने हिंदी भवन के लिए सात करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
कन्वेंशन सेंटर में अटल की स्मृति
जीवाजी विश्वविद्यालय में अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बना इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भी शहर की महत्वपूर्ण धरोहर है। करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस मल्टी आर्ट काम्पलेक्स भवन का लोकार्पण 25 सितंबर 2020 को किया गया था। करीब एक लाख वर्गफीट में फैले परिसर में विशाल आडिटोरियम, ओपन थियेटर, पांच सेमिनार हाल, कान्फ्रेंस हॉल और आर्ट गैलरी जैसी सुविधाएं हैं। यहां करीब दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है।