
उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर। अब तक मुंह और गले के (Head and Neck Cancer Day) कैंसर के लिए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और गुटखे को सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है, लेकिन केरल में हुई एक स्टडी ने इस धारणा में नया पहलू जोड़ दिया है। अध्ययन के अनुसार, ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (HPV) के वेरिएंट 16 और 18 भी लोगों में मुंह के कैंसर का कारण बन रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह वायरस हर वर्ष लगभग 3.5 से 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
चिकित्सकीय रिपोर्टों के अनुसार, अब तक ह्यूमन पेपीलोमा वायरस को मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता था। हालांकि नई स्टडी से संकेत मिले हैं कि यह वायरस उन लोगों को भी प्रभावित कर सकता है, जो तंबाकू, गुटखा या सिगरेट जैसे उत्पादों का सेवन नहीं करते।
इंदौर के कैंसर रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान समय में कुल कैंसर मरीजों में 30 से 40 प्रतिशत रोगी ओरल कैंसर से पीड़ित होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ह्यूमन पेपीलोमा वायरस स्वस्थ शरीर में भी मौजूद हो सकता है और सामान्य परिस्थितियों में इसका पता नहीं चलता। यह वायरस महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है, जबकि पुरुषों में इसकी संख्या कम होती है।
जब किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर पड़ती है, तब यह वायरस सक्रिय होकर शरीर के जीन्स को प्रभावित करना शुरू कर देता है। यही प्रक्रिया आगे चलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों ने लोगों को मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि मुंह में बार-बार छाले हों और वे 10 दिन से अधिक समय तक ठीक न हों, दांतों और मसूड़ों में लगातार सड़न बनी रहे, जीभ पर सफेद दाग दिखाई दें या मुंह खोलने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक लाल मिर्च का सेवन, सुपारी, चूना और कत्थे के मिश्रण का उपयोग भी मुंह की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ये पदार्थ मुंह में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं और ओरल कैविटी की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
इंदौर स्थित आरआरकैट ने करीब पांच वर्ष पहले मुंह के कैंसर की त्वरित जांच के लिए ओंको डायग्नोस्कोप विकसित किया था। शुरुआत में इसमें लेजर लाइट का उपयोग किया जाता था, जबकि अब इसकी जगह 370 वेवलेंथ वाली विजिबल मल्टी स्पेक्ट्रम व्हाइट एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस उपकरण की मदद से केवल 30 सेकंड में मुंह के कैंसर की जांच संभव है। आरआरकैट द्वारा विकसित यह तकनीक इंदौर के अलावा पटना, बनारस और टाटा कैंसर रिसर्च संस्थान, दिल्ली सहित कई अस्पतालों में उपयोग की जा रही है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस नैय्यर के अनुसार, मुंह के कैंसर के लिए तंबाकू, गुटखा और सिगरेट के साथ-साथ ह्यूमन पेपीलोमा वायरस भी महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। यह वायरस मुंह की अंदरूनी झिल्ली को नुकसान पहुंचाता है, जिसके बाद नाइट्रोसोमाइंस रिलीज होने लगते हैं और त्वचा कठोर होने लगती है।
उन्होंने कहा कि यदि मुंह के एक हिस्से का उपचार हो जाए, तब भी दूसरी जगह बीमारी होने की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए लोगों को शुरुआती लक्षणों को पहचानकर बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
ओरल कैंसर में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस का भी अहम रोल अब सामने आ रहा है। वर्तमान में 100 कैंसर मरीजों में से 30 से 40 को ओरल कैंसर हो रहा है। इसके उपचार में अब एडवांस इम्युनो थेरेपी व एंटीबाडी ड्रग काज्युगेट भी उपयोग की जा रही है। यदि शुरुआती स्तर पर ओरल कैंसर की पहचान कर ली जाए तो कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है।
-डॉ. राकेश तारण, कैंसर रोग विशेषज्ञ