
दिप्ति मुले, नईदुनिया, जबलपुर। घर में बने विशेष पेय पदार्थ गर्मी के मौसम में आपके पेट को ठंडा रखने में सहायक होते हैं। इनका सेवन करके आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। चने और जौ का सत्तू इस मौसम का सबसे उत्तम पेय है, जो आपके पेट को ठंडा रखता है। सभी पेय पदार्थ सभी के लिए उपयुक्त नहीं होते। कुछ विशेष सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
गर्मी में ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। खाली पेट फ्रिज का ठंडा पानी पीने से गला खराब होने के साथ पाचन बिगड़ सकता है। मटके का या सामान्य पानी पीएं। रात को दही-छाछ-नारियल पानी पीने से बचें। बेल शरबत भी शाम के बाद नहीं लेना चाहिए। शुगर, रक्तचाप, थायराइड, किडनी की दवा लेने वालों को डाक्टर से चर्चा अवश्य करना चाहिए।
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बेल का शरबत डायबिटीज वाले लागों के लिए उचित नहीं है, क्योंकि बेल स्वाभाविक रूप से मीठा होता है और इसमें गुड़ भी मिलाया जाता है, जिससे शुगर का स्तर बढ़ सकता है। कब्ज की समस्या वाले व्यक्तियों को भी बेल का शरबत सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर सुखाने वाली होती है और यह कब्ज को बढ़ा सकती है।
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सत्तू उत्तर भारत के विशेष पेय पदार्थों में सबसे ऊपर आता है। इसके कई फायदे तो इससे कुछ हानि भी है। सत्तू जहां ठंडक देता है वहीं गैस, अफारा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भी उपयुक्त नहीं है। सत्तू भारी होता है, जो किडनी में स्टोन वाले व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। थायराइड के मरीजों को भी सत्तू का सेवन डाक्टर से परामर्श के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि चना गोइट्रोजन है और यह थायराइड की दवा के प्रभाव को कम कर सकता है।
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आम का पना डायबिटीज वाले व्यक्तियों के लिए भी उचित नहीं है, क्योंकि इसमें गुड़ या चीनी मिलाई जाती है, जिससे शुगर का स्तर बढ़ सकता है। खांसी या जुकाम में कच्चा आम कफ को बढ़ा सकता है, इसलिए गले में खराश होने पर इससे दूरी बनाना ही बेहतर होगा।
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सौंफ-धनिया का पानी लगभग सभी के लिए सुरक्षित है, लेकिन जिनका रक्तचाप पहले से बहुत कम है, उन्हें इसे अधिक मात्रा में नहीं पीना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को दिन में एक गिलास से अधिक नहीं पीना चाहिए, क्योंकि अधिक सौंफ हार्मोन पर असर डाल सकती है। ज्यादा बेहतर होगा कि आप अपने चिकित्सक की सलाह से ही इसका सेवन करें।
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नारियल का पानी वैसे तो सबसे अच्छे पेय पदार्थों में आता है, लेकिन किडनी फेलियर वाले मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। निम्न रक्तचाप वाले व्यक्तियों को भी इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए, क्योंकि यह रक्तचाप को और कम कर सकता है। दिन में दो से अधिक गिलास नहीं पीना चाहिए, अन्यथा पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है।
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घर में बना ताजा दही, छाछ या मट्ठा भी बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन पेट दर्द जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि इससे पेट फूल सकता है और दस्त लग सकते हैं। सर्दी-जुकाम या अस्थमा में भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि दही की तासीर ठंडी होती है और यह कफ को बढ़ा सकती है। बेहतर होगा कि अपने चिकित्सक से परामर्श लेकर ही इसका सेवन करें।
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गुलकंद वाला दूध का स्वाद बहुत ही लाजवाब होता है, लेकिन सभी के लिए इसका सेवन हानिकारक हो सकता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए यह सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें चीनी की मात्रा अधिक होती है। यदि आपको सर्दी और खांसी की समस्या है तो भी इससे दूरी बना लें क्योंकि दूध कफ बनाता है, इसलिए रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
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खस का शरबत गर्मी में भी तरोताजा रखने की क्षमता रखता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को नहीं पीना चाहिए, उनके लिए यह हानिकारक हो सकता है। निम्न रक्तचाप की समस्या है तो आपको भी इससे दूरी बना लेनी चाहिए। अगर लेने का मन है तो डाक्टरी सलाह पर बहुत ही कम मात्रा में लेना ही उचित होगा।
कुछ सामान्य नियम हैं जिन्हें सभी को ध्यान में रखना चाहिए। खाली पेट फ्रिज का ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि इससे गला खराब हो सकता है और पाचन बिगड़ सकता है। रात को दही, छाछ या नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये कफ बनाते हैं। बेल का शरबत भी शाम छह बजे के बाद नहीं लेना चाहिए। यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो शुगर, रक्तचाप, थायराइड या किडनी की दवा लेने से पहले डाक्टर से परामर्श करना चाहिए, क्योंकि कई चीजें दवा के प्रभाव को बदल सकती हैं।
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डाक्टर और डायटीशियन इस मामले में यही सलाह देते हैं कि सभी के लिए एक जैसा नहीं होता। आयुर्वेद में "शीतल" और एलोपैथी में "कूलिंग" पेय का मतलब अलग होता है। डाक्टर मरीज की बीमारी, दवा और लैब रिपोर्ट देखकर ही सलाह देते हैं। जबलपुर के ज्यादातर फिजिशियन का कहना है कि ठंडा मतलब फ्रिज का नहीं, बल्कि तासीर ठंडी होनी चाहिए।
जनरल फिजिशियन डाक्टर आर्दश विश्नोई का कहना है कि डायबिटीज के मरीज बेल, पना और गुलकंद में शुगर होती है। बिना चीनी वाली छाछ और सत्तू ठीक हैं, लेकिन शुगर चेक करके ही पिएं। किडनी रोगियों के लिए नारियल पानी में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है, जो किडनी फेलियर में हानिकारक हो सकता है। निम्न रक्तचाप वाले मरीजों को नारियल पानी, खस और धनिया से बचना चाहिए। गैस की समस्या वाले मरीजों को सत्तू और फ्रिज की छाछ से बचना चाहिए, क्योंकि ये पाचन को प्रभावित कर सकते हैं।
डायटीशियन शैलजा बाजपेई बोलीं- इस मामले में डाक्टर से थोड़ा अलग दृष्टिकोण रखते हैं। वे कैलोरी, न्यूट्रिएंट और टाइमिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं। डायटीशियन का पहला नियम है कि "पर्सनलाइज करो"। बेल शरबत हेल्दी है, लेकिन डायबिटीज वाले के लिए यह हानिकारक हो सकता है। वजन घटाने वालों को मीठा बेल शरबत नहीं पीना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखना चाहिए। थायराइड के मरीजों को रोज सत्तू का सेवन नहीं करना चाहिए। किडनी की समस्या वालों को नारियल पानी से बचना चाहिए।
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