
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आयुर्वेद में मधुमेह (शुगर) को लेकर कहा गया है कि अनुचित आहार-विहार, व्यायाम न करना, शारीरिक श्रम कम करना, अत्यधिक तनाव आदि इन सब कारणों से व्यक्ति के त्रिदोष वात, पित्त और कफ असंतुलित हो जाते है और मधुमेह रोग को जन्म देते है। मधुमेह के लिए आयुर्वेद में साबुत अनाजों से भरपूर स्वस्थ आहार लेने की सलाह दी जाती है। ऐसा आहार रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
मधुमेह, जो एक चयापचय संबंधी स्थिति है, यह दोष असंतुलन के कारण होता है। टाइप 1 मधुमेह में आमतौर पर बचपन में शुरू होती है। टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में अग्न्याशय बहुत कम या बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता है। ऐसा माना जाता है कि आनुवंशिकता के कारण हो सकती है। ध्यान रखें कि टाइप 1 मधुमेह आमतौर पर बच्चों और किशोरों को प्रभावित करता है, लेकिन यह वयस्कों में भी विकसित हो सकता है।
टाइप 2 मधुमेह में शरीर इंसुलिन का उत्पादन करता है। हालांकि, कोशिकाएं इंसुलिन को अवशोषित करने और शर्करा को ऊर्जा में परिवर्तित करने में असमर्थ होती हैं। टाइप 2 मधुमेह विकसित होने में आमतौर पर कई वर्ष लग जाते हैं (इसलिए, यह आमतौर पर वयस्कों में होता है) और आमतौर पर अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि, मोटापा और खराब आहार के कारण होता है।
सौभाग्य से, चूंकि टाइप 2 मधुमेह एक जीवनशैली संबंधी विकार है, इसलिए जरूरी है स्वस्थ खानपान, व्यायाम और उपचार करवाकर इसके लक्षणों का उपचार कर सकते हैं और स्वस्थ जीवन जीने में समर्थ होते हैं। यह बात नईदुनिया के हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में बुधवार को शासकीय स्वशासी आयुर्वेद कालेज गौरीघाट में एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर राकेश सारस्वत ने पाठकों को परामर्श देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि मधुमेह से बचाव के लिए जरूरी है आलस्य छोड़ें, नियमित व्यायाम से जुड़ें और घर का पौष्टिक आहार ग्रहण करने के साथ ही जितना खाएं उतना ही उसे खर्च भी करें। इससे ताउम्र स्वस्थ रहने में यह युक्ति कारगर साबित होगी। खानपान यदि अच्छा होगा तो मधुमेह से बचाव संभव होगा। सुबह का व्यायाम फायदेमंद होता है, तनाव से दूरी बनाएं, रात की नींद अच्छी लें।
सवाल : मेरी उम्र 45 साल है, शुगर अभी बार्डर पर है। क्या ऐसी स्थिति में केला खाना उचित है। - अनिकेत प्रसाद, दमोह
जवाब : मेरी आपको सलाह है, मधुमेह के रोगी को केला नहीं खाना चाहिए। फल खाएं जिसमें सेव सहित अन्य शामिल हैं। बदलकर सेवन उचित माना जाता है। केले में फाइबर, पोटेशियम और विटामिन होते हैं, लेकिन उच्च कार्ब्स के कारण बहुत अधिक पके केले से बचना चाहिए। शुगर की मात्रा सीमित होगी तो सेहत के अच्छा होगा।
सवाल : मेरा वजन तेजी से बढ़ रहा है, क्या ऐसी स्थिति में मधुमेह संभव है। कृपया मार्गदर्शन करें। - कौशल सेन, नरसिंहपुर
जवाब : तेजी से वजन बढ़ना मधुमेह (डायबिटीज), विशेषकर टाइप 2 मधुमेह, का एक प्रमुख प्रारंभिक संकेत हो सकता है। जब शरीर में वसा जमा होती है, तो कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकती हैं, जिससे रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। मोटापा मधुमेह के प्रमुख कारणों में शामिल है।
सवाल : मधुमेह से मेरे माता-पिता दोनों ही पीड़ित हैं, ऐसे में उनका खानपान कैसा होना चाहिए। - शिवम कुमार, जबलपुर
जवाब : मेरा मानना है कि गेंहू शुगर को बढ़ाता है। मोटा अनाज फायदेमंद होता है, खासकर पुराना अनाज अच्छा होता है। चावल भी यदि सेवन करते हैं तो यह पुराना होना चाहिए। इसे भगोने में बनाएं और इसकी मांड जरूर निकालकर सेवन करें। उम्र के हिसाब से थोड़ा व्यायाम जरूरी है।
सवाल : मैं शुगर के प्रमुख लक्षणों को जानना चाहता हूं। ताकि सेहत को अच्छी रखने में मदद मिल सके। - सुरेंद्र किशोर, कटनी
जवाब : शुगर (डायबिटीज) के प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना खासकर रात में, बहुत ज्यादा प्यास लगना, बिना वजह वजन कम होना, अत्यधिक भूख लगना और लगातार थकान महसूस होना शामिल हैं। अन्य संकेतों में धुंधली दृष्टि, घाव का धीरे-धीरे भरना, पैरों के तलवे में अकारण जलन होना भी शामिल है।