
लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास और कला का अद्भुत संगम है। 26 जनवरी को जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, तो यह उस संविधान के सम्मान का दिन होता है जिसे दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान होने का गौरव प्राप्त है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मूल प्रति पर हमारे देश के संस्थापकों के हस्ताक्षर हैं, वह आज भी अपनी मूल चमक के साथ कैसे सुरक्षित है? आइए जानते हैं उस 'सुरक्षा कवच' के बारे में जो हमारे संविधान को सदियों तक अमर बनाए रखेगा।
हैरानी की बात यह है कि भारतीय संविधान की मूल प्रति को किसी मशीन से टाइप या प्रिंट नहीं किया गया था। इसे मशहूर कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा था। संविधान के हर पन्ने पर शांतिनिकेतन के महान कलाकार नंदलाल बोस और उनके शिष्यों द्वारा उकेरी गई कलाकृतियां भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक पेश करती हैं।
संविधान की मूल हिंदी और अंग्रेजी प्रतियां नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय (Parliament Library) में एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए कक्ष में रखी गई हैं। यहां सुरक्षा इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता और वातावरण को पूरी तरह कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया गया है।
कागज और स्याही का सबसे बड़ा दुश्मन वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन और नमी है। संविधान की मूल प्रति 'पार्चमेंट पेपर' पर लिखी गई है। अगर इसे सामान्य हवा में रखा जाए, तो ऑक्सीजन की वजह से कागज पीला पड़ सकता है और नमी से फंगस लग सकती है।
इससे निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है:
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संविधान की सुरक्षा के लिए केवल गैस ही काफी नहीं है, बल्कि कई अन्य वैज्ञानिक मानकों का पालन किया जाता है:
शुरुआत में संविधान की प्रतियों को फलालैन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ सुरक्षित रखने की कोशिश की गई थी। लेकिन 1994 में, भारत सरकार ने अमेरिकी तकनीक की मदद से वैज्ञानिक तरीके अपनाए और हीलियम गैस वाले अत्याधुनिक चैंबर तैयार किए।