विश्व अंगदान दिवस पर मिसाल: अपनों को जिंदगी देने में महिलाएं पुरुषों से 3 गुना आगे, पत्नियों और माताओं ने निभाया फर्ज
World Organ Donation Day Gwalior: आंकड़ा सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था का आंकड़ा नहीं, बल्कि उन महिलाओं के साहस और संवेदना की कहानी भी है, जिन्होंने अपने कि...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 01:26:52 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 01:27:32 PM (IST)
HighLights
- जीआरएमसी के 15 साल के आंकड़ों में दिखी त्याग की भावना
- ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी में जल्द शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट
- ट्रांसप्लांट के लिए 3 मरीज तैयार, मां-बेटी का केस प्राथमिकता परर
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जब अपनों की जिंदगी बचाने की बात आई तो रिश्तों ने त्याग की मिसाल कायम की। गजराराजा मेडिकल कालेज (जीआरएमसी) के 15 साल के आंकड़े बताते हैं कि किडनी दान करने के मामले में महिलाएं पुरुषों से करीब तीन गुना आगे हैं। वर्ष 2010 से 2025 के बीच अंगदान के लिए आवेदन करने वाले 170 लोगों में से 125 महिलाएं थीं। यानी 74 प्रतिशत किडनी दान महिलाओं ने किए, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी महज 26 प्रतिशत रही।
आंकड़ा सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था का आंकड़ा नहीं, बल्कि उन महिलाओं के साहस और संवेदना की कहानी भी है, जिन्होंने अपने किसी करीबी की जिंदगी बचाने के लिए अपने शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग तक देने का फैसला किया। आंकड़ों में सबसे ज्यादा किडनी दान पत्नियों की ओर से किए जाने की बात सामने आती है। पति की किडनी खराब होने पर पत्नी ने आगे बढ़कर किडनी दान करने का फैसला लिया। इसके बाद मां, बहन और बेटियों का स्थान रहा।
अब जीआरएमसी में भी शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट
जीआरएमसी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अस्पताल की पांचवीं मंजिल स्थित आपरेशन थिएटर का कल्चर टेस्ट चल रहा है। इसके लिए सैंपल जीआरएमसी की माइक्रोबायोलाजी लैब में भेजे गए हैं। ट्रांसप्लांट के लिए दो अलग-अलग विशेष वार्ड भी तैयार कर लिए गए हैं। इनमें एक वार्ड किडनी डोनर और दूसरा किडनी प्राप्त करने वाले मरीज के लिए आरक्षित रहेगा।
किडनी मरीजों की डायलिसिस होती हुई । नईदुनिया
हर माह करीब पांच मरीजों को जाना पड़ता है बाहर
ग्वालियर-चंबल अंचल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को दिल्ली, मुंबई और दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार अंचल से करीब पांच मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए हर माह बड़े शहरों में जाते हैं। जीआरएमसी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने के बाद ऐसे मरीजों को अपने शहर में ही इलाज का विकल्प मिल सकेगा। इससे न केवल मरीजों और उनके स्वजन को लंबी यात्रा से राहत मिलेगी, बल्कि उपचार के दौरान होने वाला अतिरिक्त खर्च और दूसरी व्यावहारिक परेशानियां भी कम होंगी।
तीन मरीज तैयार, मां-बेटी का मामला सबसे पहले
अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तीन मरीजों को चिह्नित किया गया है। इनकी जांच और जरूरी मेडिकल प्रक्रिया जारी है। तीनों मामलों में रिश्तों की अलग-अलग तस्वीर सामने आती है मां अपनी बेटी को, मां अपने बेटे को और पत्नी अपने पति को किडनी दान करेंगी। इनमें फिलहाल मां द्वारा बेटी को किडनी दान किए जाने वाले केस को प्राथमिकता दी गई है। ट्रांसप्लांट से पहले डोनर और मरीज दोनों की आवश्यक चिकित्सकीय जांच और औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
महिलाओं में त्याग की भावना और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का बोध गहरा होता है। किडनी दान के मामलों में भी यही देखने को मिलता है। परिवार के किसी सदस्य की जिंदगी बचाने के लिए महिलाएं अंगदान का निर्णय लेने में आगे रहती हैं। अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, किसी को दूसरा जीवन देने का संकल्प है और इस संकल्प को निभाने में महिलाएं आगे हैं। -डॉ. मनीष चतुर्वेदी, जीआरएमसी, एनाटामी विभाग