
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आधुनिक दौर में गलत खानपान और सुस्त जीवनशैली लिवर और किडनी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। पैदल चलना लिवर की वसा को जलाने और उसे ऊर्जा में बदलने का सबसे सरल तरीका है। नियमित वॉक न केवल चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को दुरुस्त करती है, बल्कि लिवर को कुशलता से कार्य करने में मदद भी करती है। यह कहना है सेवानिवृत्त वरिष्ठ सर्जन डॉ. रमेश बडवे का।
वे बुधवार को नवदुनिया कार्यालय में आयोजित हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में पाठकों की शंकाओं का समाधान कर रहे थे। डॉ. बडवे ने आईसीएमआर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि आज हर तीन में से एक बच्चा फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भोजन में ऊपर से कच्चा नमक लेने की आदत ब्लड प्रेशर बढ़ाती है और सीधे तौर पर किडनी व लिवर को नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने बताया कि अक्सर लोग दर्द निवारक गोलियां बिना सलाह के ले लेते हैं, जो आगे चलकर किडनी को प्रभावित करती हैं। इन दिनों किडनी की बीमारी एक साइलेंट किलर के रूप में सामने आ रही है।
पैदल चलने से घटता है ब्लड प्रेशर
डॉक्टर ने बताया कि पैदल चलना हृदय रोगों से बचाव का सबसे सस्ता इलाज है। रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद की महिलाएं जो प्रतिदिन एक से दो मील पैदल चलती हैं, वे महज 24 सप्ताह में अपना रक्तचाप 11 अंक तक कम कर सकती हैं। वॉक करने से हृदय गति संतुलित रहती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
उम्र के हिसाब से कितना चलना जरूरी?
बच्चे और किशोर (6-18 साल): कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि या वॉक।
वयस्क (18-50 साल): रोजाना 7,000 से 10,000 कदम चलना सबसे बेहतर।
वरिष्ठ नागरिक (50 साल से अधिक): रोजाना 5,000 से 7,000 कदम या 30-45 मिनट हल्की चाल।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पेशाब में बार-बार जलन होना।
हाथ-पैरों या आंखों के नीचे सूजन।
बिना कारण थकान और बढ़ता हुआ ब्लड प्रेशर।
पाचन की लगातार समस्या या लिवर में भारीपन।
पाठकों के सवाल, डॉक्टर के जवाब
सवाल: आशुतोष दुबे, कोलार
मुझे किसी भी मौसम में प्यास नहीं लगती है। क्या मुझे भविष्य में किडनी की समस्या हो सकती है?
जवाब: प्यास न लगना शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) पैदा कर सकता है, जिससे किडनी पर दबाव बढ़ता है और भविष्य में स्टोन या इन्फेक्शन का खतरा रहता है। आप प्यास का इंतजार न करें, बल्कि नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालें। दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर तरल पदार्थ जरूर लें।
सवाल: निशा, चार इमली
लिवर खराब होने के पहले क्या लक्षण होते हैं?
जवाब: इसके शुरुआती संकेत बहुत सामान्य होते हैं, जैसे- भूख कम लगना, जी मिचलाना और शरीर में भारीपन या सुस्ती आना। ऐसे में शुगर की जांच करवाना बेहद जरूरी है क्योंकि डायबिटीज लिवर को तेजी से डैमेज करती है। नियमित व्यायाम करें और फास्ट फूड का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
सवाल: शुभम, अशोका गार्डन
किडनी में संक्रमण हो रहा है, क्या सावधानी बरतें?
जवाब: किडनी इन्फेक्शन का मुख्य कारण पेशाब को रोकना या कम पानी पीना होता है। पर्याप्त पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकलें। यदि संक्रमण बार-बार हो रहा है, तो यूरिन कल्चर टेस्ट करवाएं और डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करें। सफाई का विशेष ध्यान रखें।
सवाल: अरविंद निगम, मुंबई
हर दस दिन में उल्टी होती है, इसके बाद आराम मिल जाता है।
जवाब: बार-बार उल्टी होना पित्त की थैली में पथरी या लिवर में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। यह “साइक्लिक वॉमिटिंग सिंड्रोम” भी हो सकता है। आपको पेट का अल्ट्रासाउंड और लिवर फंक्शन टेस्ट करवाना चाहिए ताकि जड़ का पता चल सके।
सवाल: सुबोध श्रीवास्तव
दो साल पहले जांच में फैटी लिवर आया था, अब क्या करूं?
जवाब: फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है। आप तुरंत अपनी डाइट से कार्बोहाइड्रेट और चीनी कम करें। रोज 30-45 मिनट तेज चलें। एक बार दोबारा अल्ट्रासाउंड कराकर देखें कि ग्रेड बढ़ा तो नहीं है। शराब और तेल-मसाले से पूरी तरह परहेज करें।
सवाल: मनीषा, एमपी नगर
किडनी खराब होने से पहले शरीर क्या संकेत देता है?
जवाब: किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत हैं- चेहरे या आंखों के नीचे सुबह के वक्त सूजन आना, पेशाब में झाग आना, भूख की कमी और रात में बार-बार पेशाब आना। ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ना भी किडनी की खराबी का एक बड़ा संकेत है।
सवाल: प्रीति, बैतूल
फैटी लिवर ग्रेड-2 आया है, क्या यह चिंताजनक है?
जवाब: ग्रेड-2 का मतलब है कि लिवर पर चर्बी का जमाव अधिक है। यह चिंताजनक तो है पर इलाज योग्य है। आप “लो-कैलोरी” डाइट लें और वजन कम करें। यदि वजन 5 प्रतिशत भी कम होता है, तो ग्रेड-2 से ग्रेड-1 पर आया जा सकता है। विटामिन-ई युक्त आहार लें और डॉक्टर से परामर्श कर हेपेटो-प्रोटेक्टिव दवाएं लें।
सवाल: पूजा, अयोध्या नगर
मुझे स्टोन हुआ था और किडनी में संक्रमण भी है।
जवाब: किडनी स्टोन ही अक्सर संक्रमण का कारण बनता है क्योंकि यह पेशाब के मार्ग में रुकावट पैदा करता है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। स्टोन का आकार छोटा है तो अधिक पानी पिएं, लेकिन यदि बड़ा है तो उसे निकलवाना जरूरी है, वरना यह किडनी को स्थायी रूप से डैमेज कर सकता है।
सवाल: मिश्री जैन (उम्र 84 साल), गुना
रात के समय तीन से चार बार बाथरूम जाना पड़ता है।
जवाब: इस उम्र में पुरुषों में यह समस्या आमतौर पर प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के कारण होती है। इसे “बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया” कहते हैं। आप एक बार प्रोस्टेट की जांच और सोनोग्राफी करवाएं। शाम के बाद तरल पदार्थों का सेवन थोड़ा कम कर दें।
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