
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सूरज ने अपने तेवर दिखाना शुरु किए तो पारा 41 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। तल्ख होते मौसम में लू लगने की आशंका और भी बढ़ गई है। खासतौर पर नौकरीपेशा, कर्मचारी और छोटे-बड़े बच्चों को। ऐसे में घर और बाहर के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर रहता है। हर किसी को अपना काम करने बाहर निकलना ही पड़ता है। ऐसी स्थिति में लू से बचने के लिए पानी ज्यादा पीना चाहिए।
यदि आप पानी नहीं पी पा रहे हैं तो नारियल पानी, नींबू पानी, सौंफ का पानी ले सकते हैं। तुलसी और मीठी नीम में नींबू डालकर सुबह के समय पानी पी सकते हैं। धूप में निकल रहे हैं तो अपने शरीर को थोड़ा ढककर बाहर निकलें। इसके कारण तेज धूप आपके शरीर पर असर कम डालेगी। खाने में तीखा, मसाले या तली हुई वस्तुएं कम से कम खाएं, क्योंकि इनको पचाने के लिए शरीर को पानी की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।
गर्मी में दोनों समय दाल, चावल, रोटी हल्का भोजन करें। फ्रिज में रखकर बासी भोजन खाने से बचें। ताजा भोजन ही खाएं। बहुत ज्यादा गर्मी है तो अपनी जेब में प्याज रखें। विशेषज्ञों द्वारा खानपान और दिनचर्या में कुछ सावधानी रखकर लू की चपेट में आने से बचने के तरीके नईदुनिया के पाठकों को बताए।
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गर्मी में ऐसे फल खाएं जिनमें पानी ज्यादा होता है। ऐसे में तरबूज और खरबूज का ज्यादा सेवन करें। गर्मी में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, ऐसे में गन्ने का रस पी सकते हैं, जिससे शरीर को ताकत मिलेगी और पानी की कमी को भी दूर करता है। धूप से घर में आकर एकदम पानी नहीं पिएं। थोड़ी देर रुककर पानी पिएं। फ्रीज का ठंडा पानी पीने से बचें, जहां तक हो सके मटका का पानी पिएं। शरीर को ठंडा रखने के लिए छाछ या लस्सी का सेवन भी कर सकते हैं। भोजन में सलाद का उपयोग ज्यादा करें। धूप में निकल रहे हैं तो सिर ढंककर बाहर निकलें। इस कारण तेज धूप आपके शरीर पर असर कम डालेगी। भोजन में अधिक मसालेदार या तली हुई वस्तुएं कम से कम खाएं, क्योंकि इनको पचाने में शरीर को पानी की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है। गर्मी में दोनों समय दाल, चावल, रोटी हल्का भोजन करें। बहुत ज्यादा गर्मी है तो अपनी जेब में प्याज रखें। - डॉ. संगीता मालू, आहार एवं पोषण विशेषज्ञ
लू सामान्य परेशानी नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्थिति बन सकती है। लू तब लगती है जब शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और खुद को ठंडा नहीं रख पाता। आमतौर पर शरीर पसीने के जरिए ठंडा होता है, लेकिन जब पानी की कमी हो जाती है या बहुत तेज गर्मी होती है, तो यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती। ऐसे में व्यक्ति को तेज बुखार, चक्कर, उल्टी, कमजोरी या बेहोशी तक हो सकती है। बच्चों में समस्या जल्दी होती है, क्योंकि उनका शरीर गर्मी को उतना अच्छे से संभाल नहीं पाता। बच्चे को धूप में बाहर न जाने दिया जाए। उन्हें बार-बार पानी, ओआरएस या नींबू पानी देते रहें। अगर बच्चा सुस्त दिखे, कम पेशाब करे या चिड़चिड़ा हो जाए, तो तुरंत ध्यान दें क्योंकि यह पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। - डॉ. श्याम झा, बाल रोग विशेषज्ञ