
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आजकल बदलती जीवनशैली के कारण कमर दर्द, गर्दन दर्द, कंधे का दर्द और जोड़ों की समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। लंबे समय तक मोबाइल चलाना, कंप्यूटर पर काम करना, गलत तरीके से बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके मुख्य कारण हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार के रूप में लोगों की मदद कर रही है।
यह कहना है फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. गुरप्रीत कौर मल्होत्रा का। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं होता, बल्कि शरीर की ताकत, लचीलापन और सामान्य गतिविधियों को फिर से बेहतर बनाना भी होता है। इसमें विशेषज्ञ मरीज की स्थिति के अनुसार व्यायाम, स्ट्रेचिंग, मैनुअल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर आधुनिक उपकरणों की सहायता से उपचार करते हैं। घुटनों का दर्द, कमर दर्द, फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल दर्द, लकवे (स्ट्रोक) के बाद की कमजोरी और खेल के दौरान लगी चोटों में फिजियोथेरेपी काफी लाभदायक साबित होती है।
कई मामलों में इससे दर्द कम होता है, शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है और दवाओं पर निर्भरता भी कम हो सकती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए उपचार हमेशा प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही कराना चाहिए। आज के डिजिटल दौर में हर 30 से 40 मिनट बाद कुछ मिनट टहलना, गर्दन और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करना तथा सही मुद्रा में बैठना बहुत जरूरी है।
नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद भी शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दर्द, चलने-फिरने में परेशानी या किसी चोट के बाद कमजोरी महसूस हो रही है, तो समय रहते फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना लाभदायक हो सकता है। सही समय पर शुरू की गई फिजियोथेरेपी दर्द से राहत दिलाने के साथ-साथ व्यक्ति को फिर से सक्रिय, आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन जीने में मदद करती है।