हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर क्यों मनाई जाती है Basant Panchami? जानें अमीर खुसरो और सूफी संत के अटूट प्रेम की कहानी
Basant Panchami का नाम सुनते ही आमतौर पर पीले वस्त्र, सरसों के खेत और मां सरस्वती की वंदना का विचार मन में आता है। लेकिन दिल्ली की ऐतिहासिक हजरत निजाम ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 22 Jan 2026 07:21:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Jan 2026 07:21:00 PM (IST)
हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर क्यों मनाई जाती है Basant Panchami?HighLights
- हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर अमीर खुसरो ने शुरू की थी वसंत की परंपरा
- अपने गुरु की उदासी दूर करने के लिए खुसरो ने पहने थे पीले वस्त्र
- मजहब की दीवारें तोड़कर 7 सदियों से दरगाह पर मनती है वसंत
लाइफस्टाइल डेस्क। Basant Panchami का नाम सुनते ही आमतौर पर पीले वस्त्र, सरसों के खेत और मां सरस्वती की वंदना का विचार मन में आता है। लेकिन दिल्ली की ऐतिहासिक हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह पर इस त्योहार का एक बेहद अनूठा और भावुक रंग देखने को मिलता है। यहां पिछले 700 वर्षों से वसंत पंचमी का पर्व एक गुरु और शिष्य के अटूट प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है।
जब गम में डूबे थे सूफी संत निजामुद्दीन औलिया
इस रवायत के पीछे की कहानी बेहद मार्मिक है। 14वीं शताब्दी में सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया अपने प्रिय भांजे की मृत्यु के बाद गहरे शोक में डूब गए थे। वे महीनों तक उदास रहे और उनके चेहरे की रौनक गायब हो गई थी। उनके सबसे प्रिय शिष्य और प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो अपने पीर (गुरु) को इस हाल में देखकर बेहद बेचैन थे और उन्हें फिर से मुस्कुराते हुए देखना चाहते थे।
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अमीर खुसरो और वसंत की वह पहली मुस्कान
एक दिन अमीर खुसरो ने देखा कि कुछ हिंदू ग्रामीण पीले वस्त्र पहनकर, हाथों में सरसों के फूल लिए और गीत गाते हुए वसंत पंचमी मनाने जा रहे हैं। खुसरो को यह उल्लास अपने गुरु के दुख को दूर करने का एक जरिया लगा।
- अनूठा प्रयास: खुसरो ने भी तुरंत पीले कपड़े पहने, हाथ में सरसों के फूल लिए और पूरबी बोली में गीत गाते हुए नाचने लगे।
- मुस्कुरा उठे गुरु: जब वे झूमते हुए अपने गुरु हजरत निजामुद्दीन के सामने पहुंचे और उनके कदमों में फूल चढ़ाए, तो उनकी यह मासूमियत और मोहब्बत देखकर हजरत निजामुद्दीन औलिया का दुख पिघल गया और वे मुस्कुरा दिए।
उसी दिन से दरगाह पर वसंत पंचमी मनाने की यह परंपरा शुरू हुई, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
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आज भी दरगाह पर बिखरती है पीली आभा
आज भी वसंत पंचमी के दिन निजामुद्दीन दरगाह का नजारा देखने लायक होता है...
- पीली सजावट: पूरी दरगाह और कव्वालों के लिबास पीले रंग के फूलों और चादरों से सराबोर होते हैं।
- वसंत की कव्वाली: अमीर खुसरो द्वारा रचित प्रसिद्ध 'कौल' और वसंत की विशेष कव्वालियां गाई जाती हैं।
- अटूट मिसाल: यह पर्व धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानी मोहब्बत और आध्यात्मिक जुड़ाव की एक जिंदा मिसाल पेश करता है।
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