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World Mental Health Day 2026: अवसाद के 70 फीसदी केस में रिश्‍तों में खटास, आर्थिक असुरक्षा और भविष्‍य की चिंता

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर समाज में अब भी झिझक दिखाई देती है। कई लोग इस डर से अपनी समस्या साझा नहीं करते कि दूसरे उन्हें कमजोर समझें...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 10:44:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 10:53:13 PM (IST)
World Mental Health Day 2026: अवसाद के 70 फीसदी केस में रिश्‍तों में खटास, आर्थिक असुरक्षा और भविष्‍य की चिंता
युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव।

HighLights

  1. 100 मरीजों में 70 अवसाद से जुड़ी समस्याओं के शिकार।
  2. मानसिक रोग विशेषज्ञ बोले...काम का दबाव बढ़ रहा है।
  3. पारिवारिक उलझनें और बदलती जीवनशैली बन रहीं चुनौती।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। काम का बढ़ता दबाव, आर्थिक चिंताएं और पारिवारिक उलझनों के बीच लोग मानसिक तनाव की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसका असर अब लोगों के व्यवहार, नींद, काम करने की क्षमता और सामाजिक जीवन पर भी दिखाई देने लगा है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर चिकित्सकों के पास पहुंचने वाले मरीजों में तनाव और अवसाद की शिकायत प्रमुखता से सामने आ रही हैं। स्थिति यह है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श के लिए आने वाले 100 मरीजों में करीब 70 मरीज तनाव और अवसाद से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं।


मनोरोग विशेषज्ञ अक्षय कदम का कहना है कि बदलती जीवनशैली में लोगों के पास आराम और खुद के लिए समय कम होता जा रहा है। नौकरी में प्रतिस्पर्धा, काम पूरा करने का दबाव, आर्थिक असुरक्षा, रिश्तों में खटास और भविष्य की चिंता मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही हैं।

कई लोग इन परेशानियों को लंबे समय तक अपने भीतर दबाए रखते हैं। धीरे-धीरे यही तनाव उनकी दिनचर्या और व्यवहार पर असर डालने लगता है। कुछ लोगों को नींद नहीं आने, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और लगातार थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

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लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

  • मानसिक परेशानी के शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य थकान या काम के दबाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
  • लगातार उदासी, पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम होना, बार-बार घबराहट होना, नींद और भूख में बदलाव या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
  • समय पर मदद मिलने से समस्या को समझने और उचित उपचार शुरू करने में सहायता मिल सकती है।

यह भी पढ़ें: स्कूल में बच्चों के तनाव और डिप्रेशन को कैसे पहचानें? इन हरकतों से बच्‍चे देते हैं संकेत

मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना जरूरी

  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर समाज में अब भी झिझक दिखाई देती है। कई लोग इस डर से अपनी समस्या साझा नहीं करते कि दूसरे उन्हें कमजोर समझेंगे।
  • जबकि तनाव और अवसाद भी ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें सही समय पर सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
  • परिवार के सदस्यों और मित्रों को भी ऐसे व्यक्ति की बात ध्यान से सुननी चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ तक पहुंचने में मदद करनी चाहिए।

जीवनशैली में बदलाव से मिल सकती है मदद

  • मनोरोग विशेषज्ञ प्रियंका शर्मा का कहना है कि नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और परिवार या मित्रों के साथ बातचीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
  • हालांकि, यदि तनाव या उदासी लंबे समय तक बनी रहे और रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होने लगे, तो केवल जीवनशैली में बदलाव पर निर्भर रहने के बजाय मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।