
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। चावल हेराफेरी मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। एसआइटी की पड़ताल में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब दोषी मिल संचालकों पर आर्थिक और व्यावसायिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।
एफसीआइ के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस जांच में जिन राइस मिलर्स की भूमिका संदिग्ध या दोषी पाई जाएगी, उन्हें भोपाल स्तर से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
एफसीआइ अब पुलिस या एसआइटी से दोषी मिलरों के संबंध में एफआइआर की कापी का इंतजार कर रहा है। एफआइआर की प्रति मिलते ही एफसीआइ आरोपित मिलरों को ब्लैकलिस्ट करेगा।
सूत्र बताते हैं कि एफसीआइ ऐसे मिलरों से वसूली का प्रस्ताव मुख्यालय भेजेगा। एसआइटी ने नोटिस देकर बालाघाट समेत महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के राइस मिलर, ट्रक ड्राइवरों को बुलाया है, जिनसे लगातार पूछताछ चल रही है।
संदिग्धों से पूछताछ और जांच में साक्ष्यों के आधार पर एसआइटी ने महाराष्ट्र के गोंदिया के बड़े राइस मिल संचालकों में शामिल जुगल प्रसाद खंडेलवाल और किशनलाल खंडेलवाल पर कार्रवाई की है।
गोंदिया में पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भर्ती जुगल प्रसाद खंडेलवाल को मंगलवार को छुट्टी दे दी गई। एसआइटी जल्द जुगल प्रसाद को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड लेगी। संभावना है कि जुगल की भी 24 जुलाई तक रिमांड ली जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, गोंदिया के ही कुछ मिल संचालकों पर जल्द एक्शन हो सकता है। एसआइटी ने कुछ मिलरों से पूछताछ की है, जिसमें टीम को चावल की हेराफेरी के पुख्ता सुबूत मिले हैं।
बालाघाट में वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल के खिलाफ एफसीआइ पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। मिल से 44 लाख रुपये की वसूली के लिए आदेश जारी किया जा चुका है। यह कार्रवाई पांच जून को हुई थी, जब एथनाल के नाम पर चावल की हेराफेरी पकड़ी गई थी।
नागरिक आपूर्ति निगम (नान) ने संचेती मिल का नाम सामने आने के बाद तत्काल मिलिंग पर रोक लगा दी थी। ब्लैकलिस्ट होने के बाद संबंधित मिलर एफसीआइ से जुड़े भविष्य के काम और सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित हो सकते हैं।
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