
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित बालाघाट चावल घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) लगातार नए साक्ष्य जुटाने में लगी है। मप्र शासन के पूर्व मंत्री और वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के बड़े भाई कुमार कावरे के साझेदार विनोद शर्मा की गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी इस कथित घोटाले की कड़ियां सामने आने के बाद एसआईटी ने अपने जांच दायरे का विस्तार कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, शनिवार को जांच अधिकारी आरोपित विनोद शर्मा को बालाघाट जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस इंडस्ट्री लेकर पहुंचे। यहां विनोद शर्मा की निशानदेही पर टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य कागजात जब्त किए।
बताया जा रहा है कि जांच टीम को राइस मिलरों और एवीजे एथनाल प्लांट के प्रतिनिधियों तथा सुपरवाइजरों के बीच हुए ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े अहम साक्ष्य भी मिले हैं। इन दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जा रही है।
चावल घोटाले का खुलासा हुए लगभग 52 दिन हो चुके हैं। इस दौरान एसआईटी अब तक 200 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस कंट्रोल रूम में प्रतिदिन 20 से 25 लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पूछताछ में ट्रक चालक, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा के राइस मिलर, ट्रांसपोर्टर तथा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से जुड़े कारोबारी शामिल हैं। जांच एजेंसी उनके बयानों का पहले दर्ज किए गए कथनों से मिलान कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी को आशंका है कि फर्जी दस्तावेज, परिवहन व्यवस्था और गोदामों की भूमिका की जांच के बाद पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है। जांच की भनक लगने के बाद चावल ढुलाई से जुड़े कई ट्रक चालक फरार बताए जा रहे हैं, जबकि कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर दिए हैं।
विनोद शर्मा की गिरफ्तारी के बाद हर्ष राइस इंडस्ट्री के अन्य साझेदारों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इंडस्ट्री में विनोद शर्मा के अलावा पूर्व मंत्री के भाई कुमार कावरे, भतीजे अविनाश कावरे और परिवार के अन्य सदस्य भी साझेदार बताए गए हैं। फिलहाल कार्रवाई केवल विनोद शर्मा पर हुई है।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात एसआईटी ने कुमार कावरे से भी पूछताछ की। जनचर्चा है कि पूरे मामले की जिम्मेदारी विनोद शर्मा पर डाली जा रही है या उन्होंने स्वयं कथित हेराफेरी की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी पहले भी कुमार कावरे और अविनाश कावरे को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ कर चुकी है। फिलहाल जांच एजेंसी ठोस साक्ष्यों के इंतजार में है। यदि जांच के दौरान हेराफेरी में कुमार कावरे या अविनाश कावरे की आंशिक संलिप्तता के भी प्रमाण मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।