
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। परसवाड़ा सीट के पूर्व विधायक, पूर्व राज्यमंत्री और वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर ‘नानू’ कावरे के लिए साल 2026 का अब तक का वक्त सवाल, विवाद और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला ‘काल’ साबित हो रहा है।
जांच में जीएसटी को कंपनी द्वारा टैक्स में की गई 70 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई। मामला गरमाया तो सियासी हलचल मची और विपक्ष ने कावरे पर पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए।
जीएसटी की छापामार कार्रवाई को 20 दिन ही बीते थे कि नानू कावरे को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बड़ा झटका दिया। टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस मिल पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे।
तीन महीने शांति छाने के बाद जून में हर्ष राइस मिल पर चावल हेराफेरी का दाग लग गया। एसआइटी को मिले साक्ष्य बताते हैं कि एफसीआइ गोदाम से छिंदवाड़ा एथनाल प्लांट के लिए रिलीज हुआ फोर्टिफाइड चावल हर्ष राइस मिल में भी अनलोड हुआ था।
राज्य जीएसटी की एंटी इवेजन ब्यूरो टीम ने नानू कावरे के भाई कुमार कावरे की हर्ष इंडस्ट्री के साथ वैनगंगा कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर में भी छापा मारा था। तीन दिनों तक दस्तावेजों की जांच चली।
टीम इस नतीजे पर पहुंची कि दोनों कंपनियों ने टैक्स में 1.51 करोड़ रुपये की गड़बड़ी और इतनी ही राशि दोनों फर्माें से सरेंडर कराई। लंबी चली जांच में पता चला था कि जीएसटी पोर्टल पर डीलर्स द्वारा फाइल किए गए रिटर्न्स में गड़बड़ी थी।
एनजीटी के छापे के रूप में नानू कावरे को 20 दिन में दूसरा झटका लगा। भोपाल स्थित एनजीटी सेंट्रल बोर्ड के आदेश पर टीम ने हर्ष राइस मिल की जांच की। आरोप लगे थे कि इंडस्ट्री लगाने के लिए पर्यावरण काे क्षति पहुंचाई गई।
मिट्टी का अवैध खनन किया गया, पेड़ काटे गए, नाले पर कब्जा किया।, लेकिन अधिकरण को वहां कोई गंभीर उल्लंघन नहीं मिला। सुधारात्मक निर्देश में हरित पट्टी विकसित, पौधरोपण करने निर्देशित किया।
छिंदवाड़ा के एथनाल प्लांट के लिए निकला चावल से भरा ट्रक चार जून की रात संचेती राइस मिल में मिलने से बड़ा घोटाला उजागर हुआ। पड़ताल हुई तो कई डिजिटल साक्ष्य एसआइटी के हाथ लगे। इस हेराफेरी में हर्ष राइस मिल का भी नाम जुड़ गया।
आरोप है कि हर्ष राइस मिल में सरकारी चावल खपाया गया है। कुमार कावरे सहित बिजनेस पार्टनर विनोद शर्मा और कावरे परिवार के अन्य सदस्यों से एसआइटी ने विस्तृत पूछताछ की है।
बैहर विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय सिंह उइके ने कहा- ‘ये प्रमाणित है कि पूर्व मंत्री कावरे ने हमेशा अपने पद का दुरुपयोग किया है। चावल की हेराफेरी मामले की जांच डेढ़ माह से चल रही है।
अगर इसमें विपक्षी पार्टी के किसी नेता का नाम आता, तो चार दिन में कार्रवाई हो जाती, लेकिन एसआइटी की जांच में सत्ता का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। एसआइटी मामले को दबाने और बड़े नामों को बचाने का प्रयास कर रही है।’