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बालाघाट में मलेरिया-खसरे का संक्रमण, 40 बिस्तरों पर 120 बच्चों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

जगह कम पड़ी तो एनआरसी, मदर वार्ड और कोविड आइसीयू को भी बच्चों के लिए खोलना पड़ा। हालात यह हैं कि हर दिन औसतन 20 नए बच्चे भर्ती हो रहे हैं और लगभग इतने...और पढ़ें

By Yogesh Kumar GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 01 Sep 2026 07:40:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 01 Sep 2026 07:40:20 PM (IST)
बालाघाट में मलेरिया-खसरे का संक्रमण, 40 बिस्तरों पर 120 बच्चों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद
बेड की कमी के कारण शिशु वार्ड में एक बिस्तर पर दो-तीन बच्चे भर्ती हैं। नईदुनिया

HighLights

  1. 40 की क्षमता वाले शिशु वार्ड में तिगुने मरीज
  2. एनआरसी, मदर वार्ड और कोविड आइसीयू ही सहारा
  3. लगातार बीमार बच्चे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले के बैगा आदिवासी अंचल में मलेरिया और खसरे के संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। प्रभावित गांवों से लगातार बीमार बच्चे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन अस्पताल की क्षमता मरीजों के दबाव के आगे छोटी पड़ रही है।

शिशु वार्ड में चल रहा है करीब 120 बच्चों का इलाज

40 बिस्तर की क्षमता वाले शिशु वार्ड में करीब 120 बच्चों का इलाज चल रहा है। यानी क्षमता से तिगुने मरीज शिशु वार्ड में भर्ती हैं। जगह कम पड़ी तो एनआरसी, मदर वार्ड और कोविड आइसीयू को भी बच्चों के लिए खोलना पड़ा। हालात यह हैं कि हर दिन औसतन 20 नए बच्चे भर्ती हो रहे हैं और लगभग इतने ही स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं।


100 प्रतिशत रिकवरी के दावे के बीच तस्वीर समझना जरूरी

करीब 20 स्टाफ नर्स लगातार ड्यूटी कर रही हैं और एक महीने से किसी ने छुट्टी नहीं ली है। दो माह में 400 बच्चों के स्वस्थ होने का दावा अस्पताल प्रबंधन कर रहा है, लेकिन इसी बीच मौतों के आंकड़े और 100 प्रतिशत रिकवरी के दावे के बीच तस्वीर को समझना जरूरी है। अब सवाल सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने का नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा आने पर पर्याप्त बेड और संसाधन उपलब्ध कराने का भी है।

बिस्तर बढ़ाने भोपाल स्तर पर पत्राचार

जिला अस्पताल के अलग-अलग वार्ड में बिस्तरों की कमी शुरू से है। इसे लेकर हर बार प्रशासनिक दावे और वादे होते हैं, लेकिन बिस्तरों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं होती और न ही अतिक्ति वार्ड की व्यवस्था हो पाती है। महामारी की मौजूदा परिस्थिति ने शिशु वार्ड में बिस्तर की कमी को उजागर किया है।

शिशु वार्ड में बिस्तर बढ़ाने के लिए विभागीय पत्राचार

सीमित संसाधनों के बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन लगातार मासूम बच्चों की जांच, दवाइयां, सुबह-शाम का भोजन, चाय-नाश्ता आदि मुहैया करा रहा है। सिविल सर्जन डा. निलय जैन ने भोपाल स्तर पर शिशु वार्ड में बिस्तर बढ़ाने के लिए विभागीय पत्राचार किया है।

बाजार से खरीदनी पड़ीं दवाइयां, प्लाज्मा

बीमारी के प्रकोप के कारण महीनेभर पहले जब हालात बेकाबू थे, तब अस्पताल प्रबंधन को कई दवाइयां, बच्चों के शरीर पर आने वाले दानों पर लगाई जाने वाली क्रीम, प्लाज्मा तक बाजार से खरीदना पड़ा था। जानकारी के अनुसार, जिन दवाइयों या अन्य संसाधन की कमी होती है, तत्काल उसे बाजार से लाकर उपयोग किया जाता है, ताकि बच्चों के उपचार में बाधा न आए।

मुख्य बिंदु

  • 16 बिस्तरों वाला पीआइसीयू फुल है।
  • शिशु वार्ड में बिस्तर बढ़ाकर बच्चे भर्ती किए गए हैं।
  • एनआरसी, कोविड आइसीयू व मदर वार्ड में भी बच्चे भर्ती हैं।
  • अस्पताल का दावा है कि सिर्फ एक बच्चे की मृत्यु अस्पताल में हुई है।
  • अन्य बच्चे को रेफर करने के बाद निजी अस्पताल में मृत्यु हुई थी।

डाक्टरों और स्टाफ नर्स की टीम बैगा अंचलों के बच्चों की लगातार निगरानी रखे हुए हैं। बिस्तरों की कमी को वैकल्पिक व्यवस्था से दूर किया गया है। मदर वार्ड, कोविड आइसीयू व एनआरसी में बैगा बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। बिस्तर बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पर मांग भेजी है। राहत की बात है कि टीम के अथक प्रयासों से बच्चों की सेहत सुधर रही है। पालकों व मरीज के खाने-पीने का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

डाॅ. निलय जैन, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

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