'एक डिग्री, दो डॉक्टर' MP में मुन्नाभाई वाला खेल, बालाघाट और देवास के डॉक्टरों की एक जैसी MBBS उपाधि पर उठे सवाल
बिरसा विकासखंड में पदस्थ बीएमओ डॉ. सुनील कुमार सिंह और देवास जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. सुनील कुमार की एमबीबीएस की डिग्री सवालों के घेरे में है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Apr 2026 06:31:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Apr 2026 06:31:46 PM (IST)
रोगी की स्वास्थ्य जांच करते बिरसा बीएमओ डॉ. सुनील कुमार सिंहHighLights
- एक ही डिग्री पर दो डॉक्टरों के सेवा देने का आरोप
- मेडिकल काउंसिल को जांच के लिए भेजा गया मामला
- कार्रवाई का अधिकार काउंसिल के पास
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। बालाघाट के बिरसा विकासखंड में पदस्थ बीएमओ डॉ. सुनील कुमार सिंह और देवास जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. सुनील कुमार की एमबीबीएस की डिग्री सवालों के घेरे में है। दोनों चिकित्सकों की डिग्री में एक जैसा नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, डिग्री वर्ष, कालेज का नाम दर्ज है।
क्या है आरोप
आरोप है कि एक ही एमबीबीएस की डिग्री पर दो चिकित्सक प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। ये मामला अब बालाघाट स्वास्थ्य विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। डिग्री की सच्चाई जानने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने विभाग के आयुक्त को पत्राचार किया है। इसके अलावा मामले की जांच मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल करेगी।
मेडिकल काउंसिल से पत्राचार
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप का कहना है कि मामले में उन्होंने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल से पत्राचार किया है। दरअसल, यह साफ नहीं हो पा रहा है कि बालाघाट में नौकरी कर रहे डा. सुनील कुमार सिंह की डिग्री असली है या देवास जिला अस्पताल में पदस्थ डा. सुनील कुमार की। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप है।
निलंबन या सेवा समाप्ति का अधिकार काउंसिल का
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उपलप ने बताया कि डिग्री से जुड़ा ये मामला गंभीर है। हालांकि, जब तक सच सामने नहीं आता, तब तक किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त और मप्र मेडिकल काउंसिल को दी गई है। अब जांच में सब साफ होगा। चिकित्सक के निलंबन या सेवा समाप्ति का अधिकार काउंसिल के अधीन है।
पहले हुआ था शिकायत
बता दें कि बालाघाट में वर्ष 2008 में डॉ. सुनील कुमार सिंह ने संविदा चिकित्सक से अपनी सेवा शुरू की थी और 2012 में वे नियमित बिरसा में पदस्थ हो गए। उनके खिलाफ वर्ष 2017-2018 में पहली बार शिकायत हुई थी। शिकायत के आधार पर डॉ. सिंह को यहां से हटाने के आदेश हो गए थे। इसमें लगी याचिका के बाद इन्हें तबादले से राहत मिल गई थी। तब से डॉ. सिंह बिरसा में ही पदस्थ हैं। हालांकि, पूर्व की शिकायत की जांच में कौन-से तथ्य सामने आए थे, यह स्वास्थ्य विभाग नहीं बता पा रहा है।
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