
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। बालाघाट पुलिस ने एआइ (फेस एनालिसिस टूल) की मदद से फर्जी सिम मामले का बड़ा खुलासा किया है। जिले में वर्ष 2019 से 2022 तक पांच अलग-अलग चेहरों (फेस) से 450 सिम एक्टिवेट की गई है।
ये सिम पीओएस एजेंटों ने कूटरचित दस्तावेजों की मदद से एक्टिवेट कर भोपाल और उत्तरप्रदेश तक पहुंचाई है। कोतवाली थाने में तीन प्रकरणों में कुल 19 आरोपितों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इनमें से बालाघाट के तीन आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इन्हें न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड ली जाएगी।
पूछताछ में पुलिस ये जानने का प्रयास करेगी कि इन सिम का इस्तेमाल कहां, कैसे और कब से हो रहा था। एसपी आदित्य मिश्रा ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है।
बुधवार को एसपी आदित्य मिश्रा ने प्रेसवार्ता में फर्जी सिम के रैकेट का खुलासे करते हुए बताया कि राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय के निर्देशन में संचालित ‘आपरेशन फेस’ के तहत ये कार्रवाई की गई है।
फर्जी सिम का नेटवर्क प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय है। इसके लिंक मंडला, डिंडोरी, भोपाल और उत्तरप्रदेश से मिले हैं। पिन कोड के आधार पर एआइ से बालाघाट में उन पांच चेहरों का पता चला है, जिसकी मदद से 450 सिम एक्टिवेट की गई है। ये सिम आरोपितों द्वारा भोपाल और उत्तप्रदेश में बेजी जा रही थी।
- फेस एनालिसिस टूल ने चेहरे के छह नोड के पेयर से पहचान की कि सिम के लिए एक ही चेहरे का इस्तेमाल किया गया है।
- एक महिला के चेहरे का इस्तेमाल कर 72, अन्य व्यक्ति के चेहरे से 97 सिम एक्टिवेट की गई है।
- पुलिस ने जिनके नाम पर सिम जारी हुई है, उनसे जब पूछताछ की, तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया।
- पुलिस को मामले में उत्तरप्रदेश के तार मिले हैं। जहां से लोग भोपाल आते थे और सिम खरीदकर उत्तरप्रदेश लौट जाते थे।
- पुलिस को अनुमान है कि इन फर्जी सिम का उपयोग साइबर अपराध में किया गया है।
- दूसरी संभावना है कि टेलीकाम कंपनियों के लक्ष्य प्राप्त करने पीओएस संचालकों ने ज्यादा से ज्यादा सिम एक्टिवेट की हों।
साइबर अपराध में फर्जी सिम के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए डिपार्टमेंट आफ टेलीकम्यूनिकेशन ने आपरेशन फेस प्रोजेक्ट लान्च किया है। एआई की मदद से फेसियल बायोमैट्रिक फीचर का अध्ययन करने पर पता चला है कि बालाघाट में 2019 से 2022 के बीच पांच व्यक्तियों के चेहरे का उपयोग कर अलग-अलग नाम, पते पर 450 सिम एक्टिवेट की गई है। ये कूटरचित दस्तावेजाें की मदद से अंजाम दिया गया है। भोपाल और उत्तरप्रदेश के लिए टीम रवाना की गई है। इन सिम का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया है, इसकी जांच की जा रही है।
आदित्य मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट