
नईदुनिया प्रतिनिधि, सेंधवा/ बड़वानी : शहर के प्रमुख कपास व्यापारी और उद्योगपति अशोक तायल तथा उनके परिवार से जुड़े ठिकानों पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी की अलग-अलग टीमों ने जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित निवास, पुराने एबी रोड वाले मकान और वरला रोड स्थित राजराजेश्वर जिनिंग फैक्ट्री पर एक साथ दबिश दी। बंद कमरों में केंद्रीय बलों की मौजूदगी में दस्तावेजों की जांच जारी है।
पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने सेंधवा में ईडी की इस कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि, ईडी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई राजराजेश्वर वेंचर्स से जुड़े करोड़ों रुपए के लोन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हो सकती है। जस्ट टीम में शामिल अधिकारियों ने कोसेभी जानकारी देने से मना कर दिया।
गौरतलब है कि करीब आठ महीने पहले 8 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कोलकाता इकाई ने नाबार्ड बैंक भोपाल से जुड़ी 13 करोड़ रुपए की लोन धोखाधड़ी के मामले में तायल बंधुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई की जांच में सामने आया था कि निमाड़ एग्रो पार्क के संचालक अर्पित तायल, निकुंज तायल, अशोक तायल और अंकित तायल ने वर्ष 2019 में जामली गांव में एक एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर प्रोजेक्ट के लिए नाबार्ड की योजना के तहत 13 करोड़ रुपए का लोन लिया था।
31 करोड़ रुपए की इस परियोजना में केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की तरफ से 10 करोड़ रुपए का अनुदान (सब्सिडी) भी स्वीकृत हुआ था। सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने योजना पर पैसा खर्च करने के बजाय फर्जी समझौतों के जरिए लोन की राशि अन्य कंपनियों और व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर दी। परियोजना की समय-सीमा बढ़ाकर बैंक को गुमराह किया गया और सितंबर 2024 में यह खाता एनपीए (NPA) घोषित हो गया। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज होने के बाद अब ईडी ने इस वित्तीय हेराफेरी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज कर दी है।
तायल परिवार सेंधवा के शीर्ष कपास कारोबारियों में गिना जाता है। बड़वानी जिले के अलावा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी इनकी कई जिनिंग फैक्ट्रियां और व्यावसायिक नेटवर्क फैला हुआ है। शहर से 10 किलोमीटर दूर स्थित निमाड़ एग्रो पार्क का संचालन भी यही परिवार करता है। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से शहर के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
तायल बंधु सेंधवा शहर के बड़े कपास व्यापारी और उद्योगपति हैं। वे कपास की जिनिंग फैक्ट्रियों का संचालन करते हैं। बड़वानी जिले के साथ महाराष्ट्र जैसे दूसरे राज्यों में भी इनका कारोबार है। शहर से करीब 10 किमी दूर निमाड़ एग्रो पार्क भी तायल बंधु ही चलाते हैं।
आठ महीने पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नाबार्ड बैंक भोपाल से जुड़े 13 करोड़ रुपए के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई की थी। सीबीआई टीम ने पुलिस बल के साथ शहर की जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित उद्योगपति अशोक तायल के निवास सहित तायल बंधुओं के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी थी। तब कोलकाता स्थित सीबीआई इकाई ने इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
सीबीआई की ओर से 8 जनवरी को दर्ज एफआईआर के अनुसार, निमाड़ एग्रो पार्क के संचालक अर्पित राजेंद्र कुमार तायल, निकुंज गिरधारीलाल तायल, अशोक बिहारीलाल तायल और अंकित गिरधारीलाल तायल सहित कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और दस्तावेजों की जालसाजी के गंभीर आरोप हैं।
जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2019 में आरोपियों ने नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत सेंधवा के पास जामली गांव में एक कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के लिए 13 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इस परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई थी, जिसमें केंद्र सरकार के फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय की ओर से 10 करोड़ रुपए का अनुदान भी स्वीकृत हुआ था।
सीबीआई के अनुसार आरोपियों ने परियोजना पर खर्च करने के बजाय फर्जी समझौतों के जरिए ऋण की राशि को अन्य कंपनियों और खातों में स्थानांतरित कर दिया।
उन्होंने समय-समय पर परियोजना की समय-सीमा बढ़वाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह भी किया। सितंबर 2024 में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया। जिसके बाद ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई को जांच के लिए पत्र लिखा गया और अब इस मामले में कार्रवाई तेज हो गई है।
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