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मालिक की अर्थी उठते ही पालतू कुत्ते डुग्गू ने भी तोड़ दिया दम, अंतिम यात्रा में छलक पड़े सबके आंसू, दोनों को एक साथ दी गई विदाई

कहते हैं कि सच्चा प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं होता, वह हर परिस्थिति में अपना एहसास करा देता है। बैतूल शहर में इंसान और उसके पालतू साथी के बीच अटूट रिश...और पढ़ें

By Vinay VermaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 07:06:28 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 07:06:28 PM (IST)
मालिक की अर्थी उठते ही पालतू कुत्ते डुग्गू ने भी तोड़ दिया दम, अंतिम यात्रा में छलक पड़े सबके आंसू, दोनों को एक साथ दी गई विदाई
आखिरी सफर में भी मालिक को अकेला नहीं छोड़ गया डुग्गू।

HighLights

  1. बैतूल में रातभर मालिक के इंतजार में तड़पता रहा बेजुबान
  2. अंतिम यात्रा में पीछे-पीछे चलकर त्याग दिए अपने भी प्राण
  3. आखिरी सफर में भी मालिक को अकेला नहीं छोड़ गया डुग्गू

नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। कहते हैं कि सच्चा प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं होता, वह हर परिस्थिति में अपना एहसास करा देता है। बैतूल शहर में इंसान और उसके पालतू साथी के बीच अटूट रिश्ते की ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई, जिसने अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

शहर के सिविल लाइन निवासी प्रदीप जैन (67) का भोपाल स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे पिछले आठ दिनों से अस्वस्थ थे। उनका पार्थिव शरीर बैतूल लाया गया, जहां स्वजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए जुटे। लेकिन इस विदाई का सबसे भावुक चेहरा था उनका 15 वर्षों से साथ निभा रहा पालतू श्वान 'डुग्गू'।


रातभर मालिक के इंतजार में तड़पता रहा डुग्गू

जैसे ही प्रदीप जैन का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, डुग्गू उनके पास से हटने को तैयार नहीं था। स्वजन ने अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान उसे दूसरे कमरे में बंद कर दिया, लेकिन वह पूरी रात बेचैन रहा। उसकी करुण आवाजें मानो अपने प्रिय मालिक को पुकार रही थीं। वह बार-बार बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, जैसे उसे एहसास हो गया हो कि उसका सबसे प्रिय साथी अब कभी लौटकर नहीं आएगा।

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अर्थी के साथ चला... फिर थम गई उसकी भी सांसें

जब सुबह अंतिम यात्रा निकली तो डुग्गू भी किसी तरह बाहर आ गया और अपने मालिक की अर्थी के पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ ही कदम चलने के बाद अचानक उसकी सांसें उखड़ने लगीं और देखते ही देखते उसने भी वहीं दम तोड़ दिया। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल लोग स्तब्ध रह गए। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि 15 वर्षों तक अपने मालिक का साथ निभाने वाला यह बेजुबान साथी, आखिरी सफर में भी उन्हें अकेला छोड़ने को तैयार नहीं था।

एक साथ हुई अंतिम विदाई

डुग्गू की मृत्यु के बाद स्वजन ने उसे भी परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया। उसकी भी अर्थी सजाई गई और दोनों की अंतिम यात्रा साथ-साथ गंज मोक्षधाम पहुंची। प्रदीप जैन का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया, जबकि डुग्गू को श्मशान परिसर के समीप पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया। यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भर आईं।

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परिवार नहीं, रिश्ते से था जुड़ा

स्वर्गीय प्रदीप जैन के छोटे भाई दिलीप जैन ने बताया कि लगभग 15 वर्ष पहले बड़े भाई डुग्गू को घर लाए थे। तभी से वह परिवार का हिस्सा बन गया था। बड़े भाई के घर आते ही वह दौड़कर उनके पास पहुंच जाता था। परिवार के सदस्यों के प्रति उसका व्यवहार इतना स्नेहपूर्ण था कि वह उनके पैर तक छूता था। यदि बड़े भाई बीमार पड़ते तो डुग्गू भी खाना-पीना छोड़ देता और उदास रहने लगता था। दोनों के बीच ऐसा अपनापन था कि आखिरी सांस तक वह उनसे अलग नहीं हो सका।