भिंड को सैनिक स्कूल के लिए करना होगा और इंतजार, सत्र 2026-27 में भी नहीं शुरू होंगी कक्षाएं; 9 साल से अटका प्रोजेक्ट
ऐसे में लगातार नौ वर्षों से सैनिक स्कूल की राह देख रहे जिले के विद्यार्थियों को इस वर्ष भी दूसरे जिलों के सैनिक स्कूलों का रुख करना पड़ेगा।
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 12:10:09 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 12:10:46 PM (IST)
मालनपुर में निर्माणाधीन सैनिक स्कूल भवन। नईदुनियाHighLights
- गोहद में लाखों खर्च के बाद भी अस्थायी परिसर तैयार नहीं
- सैन्य शिक्षा के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता
- रक्षा मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार बरकरार
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। भिंड जिले के मालनपुर में प्रस्तावित सैनिक स्कूल का इंतजार कर रहे छात्रों और अभिभावकों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए भी सैनिक स्कूल की कक्षाएं शुरू नहीं हो सकेंगी। जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए अब तक प्रवेश प्रक्रिया और सीटें जारी नहीं की गई हैं। ऐसे में लगातार नौ वर्षों से सैनिक स्कूल की राह देख रहे जिले के विद्यार्थियों को इस वर्ष भी दूसरे जिलों के सैनिक स्कूलों का रुख करना पड़ेगा।
दिल्ली-झांसी अधिकारी कई बार कर चुके हैं निरीक्षण
जिले में सैनिक स्कूल की अस्थायी कक्षाएं शुरू कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने गोहद स्थित मॉडल स्कूल और छात्रावासों में आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार कराने पर लाखों रुपये खर्च किए थे। पिछले तीन वर्षों में सैनिक स्कूल सोसाइटी के दिल्ली और झांसी से आए अधिकारियों ने कई बार निरीक्षण भी किया, लेकिन संचालन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
लेफ्टिनेंट प्रसस्ति चौहान ने तलाशी थी संभावनाएं
फरवरी 2026 में सैनिक स्कूल सोसाइटी की प्राचार्य लेफ्टिनेंट प्रसस्ति चौहान ने निर्माणाधीन परिसर का निरीक्षण कर गोहद के मॉडल स्कूल में अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करने की संभावनाएं देखी थीं। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर केएल मीना से चर्चा कर आवश्यक रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिल सकी।
छात्रों को दूसरे जिलों की ओर करना पड़ रहा रुख
सैनिक स्कूल में प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह लगातार दूसरा बड़ा झटका है। नए सत्र के लिए सीटें जारी नहीं होने से भिंड जिले के छात्र इस वर्ष भी रीवा और झांसी सहित अन्य सैनिक स्कूलों में प्रवेश लेने को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिले में सैनिक स्कूल शुरू होने से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सैन्य शिक्षा स्थानीय स्तर पर मिल सकती थी, लेकिन लगातार हो रही देरी से उनका इंतजार बढ़ता जा रहा है।
नौ साल से इंतजार, युवाओं की उम्मीदें बरकरार
जिले के लिए सैनिक स्कूल का विशेष महत्व माना जा रहा है। यह विद्यालय वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ था और इसे केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत देश के अंतिम सैनिक स्कूलों में शामिल किया गया था। चंबल क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होते हैं। ऐसे में सैनिक स्कूल शुरू होने से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और सशस्त्र बलों में जाने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिलने की उम्मीद है।
सैनिक स्कूल सोसाइटी की ओर से वर्ष 2026-27 सत्र में कक्षाएं शुरू करने संबंधी कोई अंतिम निर्णय नहीं मिला है। सोसाइटी के निर्धारित मानकों के अनुसार मॉडल स्कूल में कुछ आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में इस सत्र में कक्षाएं शुरू होना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा। -सुंधाशु द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी, भिंड।