
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। सड़क पर तड़प रहे एक बेजुबान की पीड़ा देखकर भोपाल के साजिदा नगर में रहने वालीं माधवी ने इंसानियत की मिसाल पेश की। घायल श्वान के पिछले दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे, जिसके कारण वह सड़क पर घिसटकर चल रहा था। श्वान की हालत देखकर माधवी ने उसका उपचार कराने का निर्णय लिया और उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए करीब 10 घंटे का सफर तय कर मंगलवार को भोपाल से भिंड पहुंचीं।
माधवी ने बताया कि उन्होंने अपने घर के बाहर सड़क पर श्वान को दर्द से तड़पते देखा था। उसके पिछले पैर काम नहीं कर रहे थे और वह घिसटते हुए चल रहा था। उसकी स्थिति देखकर उन्होंने उसे किसी पशु अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने भोपाल स्थित पशु अस्पताल से संपर्क किया। अस्पताल प्रबंधन ने उपचार करने की बात तो कही, लेकिन श्वान को अपने पास रखने में असमर्थता जताई।
इसके बाद माधवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे स्थान की तलाश शुरू की, जहां घायल और बेसहारा पशुओं की देखभाल की जाती हो। इसी दौरान उन्हें भिंड स्थित इंसानियत आश्रम की जानकारी मिली। उन्होंने इंसानियत समिति के संचालक अनंत इंसानियत से संपर्क कर श्वान की पूरी स्थिति बताई।
आश्रम की ओर से उसे लाने की सहमति मिलने के बाद माधवी मंगलवार सुबह अपनी मां और भाई के साथ कार से भोपाल से भिंड के लिए रवाना हुईं। करीब 10 घंटे की यात्रा के बाद वे इंसानियत आश्रम पहुंचीं और घायल श्वान को वहां भर्ती कराया।
आश्रम में उसके उपचार एवं देखभाल की व्यवस्था की गई। माधवी की मां ने आश्रम की व्यवस्थाएं देखकर भावुक होते हुए कहा कि यह स्थान उन्हें किसी मंदिर से कम नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह यहां बेजुबान और बेसहारा पशुओं की सेवा की जा रही है, वह मानवता का बहुत बड़ा उदाहरण है।
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