
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एक तरफ रेलवे बड़े-बड़े दावे करता है। ट्रेनों के संचालन से लेकर समयबद्धता पर जोर दिया जाता है, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो। वहीं, दूसरी तरफ रेल कर्मचारियों के एक हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। दरअसल, रनिंग स्टाफ की कमी के चलते कर्मचारियों को लगातार लंबी शिफ्ट और ओवरड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके चलते रेल कर्मचारियों में लगातार तनाव और थकान रहने से ट्रेनों के परिचालन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
वर्तमान में भोपाल रेल मंडल में पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा रही है। अभी भी स्टेशन संचालन से लेकर पटरियों पर सिग्नल संभालने वाले सुरक्षा श्रेणी के 1,145 पद रिक्त पड़े हैं। यदि स्थिति रही तो कभी भी कोई हादसा या अनहोनी हो सकती है। रेल संचालन को बेहतर बनाने के लिए रिक्त पदों को भरने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
वर्ष 2020 से 2024 के बीच रेलवे में सेफ्टी कैटेगरी के पदों पर नियमित भर्ती न होने से मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है। 2025 में 178 एएलपी की भर्ती हुई, लेकिन स्टेशन मास्टर, लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर के पदों पर कमी अब भी चुनौती है। बिना पर्याप्त आराम के लंबी ड्यूटी से मानसिक थकान बढ़ती है, जिसका असर सुरक्षित रेल संचालन पर पड़ सकता है। - आर के शर्मा, मंडल अध्यक्ष, डब्लूसीआर यूनियन
ऐसी कोई असुरक्षा वाली बात नहीं है। भोपाल मंडल में स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्समैन, ट्रेन मैनेजर और लोको पायलट के रिक्त पदों पर चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जा रही है। हाल ही में 178 नए एएलपी ने ज्वाइन किया है और 191 अन्य एएलपी का चयन हो चुका है, जिन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी कर तैनात किया जाएगा। - अभिराम खरे, अपर मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम), भोपाल मंडल