
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में डॉक्टर तैयार करने वाले मेडिकल कॉलेज ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। शासकीय दस्तावेज के मुताबिक 2025 में प्रदेश के 14 स्वशासी मेडिकल कालेजों में कुल 3205 स्वीकृत पदों में से 894 पद खाली हैं। यानी 28% पदों पर फैकल्टी ही नहीं है। वहीं छह नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की हालत और खराब है, यहां 68.97% पद रिक्त पड़े हैं।
श्योपुर, सिंगरौली, नीमच, मंदसौर, सिवनी और सतना के नए मेडिकल कालेजों में कुल 716 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 233 पर ही डाक्टर कार्यरत हैं। 483 पद खाली हैं। सिंगरौली में 89.66% और श्योपुर में 88.79% पद रिक्त हैं। नीमच में 73.28%, मंदसौर में 61.21% और सिवनी में 54.31% पद खाली हैं।
सतना की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है, फिर भी यहां 41.91% पद रिक्त हैं।पुराने कालेज भी अछूते नहींस्वशासी सागर मेडिकल कालेज में 49.44% यानी 269 में से 133 पद खाली हैं।
छिंदवाड़ा में 49.68% पद रिक्त हैं। खंडवा में 45.45%, शहडोल में 39.22% और शिवपुरी में 35.92% पद खाली हैं। बड़े कालेजों में जबलपुर में 25.28%, ग्वालियर में 21.25%, रीवा में 21.79% और इंदौर में 20.25% पद रिक्त हैं। भोपाल में सबसे कम 16.24% पद खाली हैं।
दरअसल, शैक्षणिक संवर्ग के कुल स्वीकृत पदों पर चरणबद्ध तरीके से एनएमसी यानी नेशनल मेडिकल काउंसिल से एलओपी-लेटर आफ परमिशन की आवश्यकता के अनुसार ही भर्तियां की जाएंगी। फिलहाल प्रदर्शक पदों की पूर्ति बंध पत्र चिकित्सकों से की गई है। नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रचलन में है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के सीएम, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के जिलों में मेडिकल कालेजों को मान्यता मिलने के आसार
विभाग का कहना है कि अधिकांश रिक्त पद पदोन्नति के हैं। फैकल्टी की कमी का सीधा असर एमबीबीएस की पढ़ाई और मरीजों के इलाज दोनों पर पड़ रहा है। प्राध्यापक के 430 स्वीकृत पदों में से 129, सह प्राध्यापक के 727 में से 166 और सहायक प्राध्यापक के 1182 में से 322 पद खाली हैं। एनएमसी के मानकों के मुताबिक पर्याप्त फैकल्टी न होने पर कालेजों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।