भोपाल की 43 कॉलोनियां अवैध चिन्हित... शहरी नियोजन की उड़ी धज्जियां, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने राजधानी में शहरी नियोजन और निर्माण विनियमन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा क ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 10:33:15 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2026 10:33:15 PM (IST)
भोपाल की 43 कॉलोनियां अवैध चिन्हितनईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने राजधानी में शहरी नियोजन और निर्माण विनियमन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार 2018 से 2023 के बीच भोपाल नगर निगम (ननि) ने 15 हजार 463 भवन निर्माण अनुज्ञाएं जारी कीं, जबकि मध्य प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना विभाग (टीएंडसीपी) द्वारा इसी अवधि में केवल 860 विकास अनुज्ञाएं दी गईं।
इसका मतलब है कि 14 हजार 603 भवन अनुज्ञाएं बिना संबंधित विकास स्वीकृति के जारी की गईं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ननि ने 170 कॉलोनी विकास अनुमतियां दीं, लेकिन शहर में 43 अवैध कॉलोनियां अस्तित्व में पाई गईं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ओपन स्पेस मानकों का उल्लंघन
एमपी भूमि विकास नियम (एमपीबीवीएन) के नियम 42 के तहत 45 मीटर तक की ऊंची इमारतों के बीच न्यूनतम 15 मीटर की दूरी अनिवार्य है, लेकिन विरशा कॉलोनी में 30-30 मीटर ऊंचाई के दो टावरों के बीच मात्र सात मीटर का अंतर पाया गया, जो अग्नि सुरक्षा, प्रकाश और वेंटिलेशन के मानकों के विपरीत है।
अनधिकृत ऊंचाई और एफएआर वृद्धि
नियम 65 के अनुसार भवन की अधिकतम ऊंचाई सड़क चौड़ाई और स्वीकृत एफएआर पर निर्भर करती है। ऑडिट में छह मामलों में स्वीकृत सीमा से अधिक निर्माण पाया गया। पालक पैलेस बारात घर में स्वीकृत जी प्लस 1 योजना के विरुद्ध जी प्लस 2 मंजिल का निर्माण किया गया।
दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी
टीएंडसीपी जो नियोजित शहरी विकास के लिए तकनीकी सलाहकार संस्था है, प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकी। ननि और टीएंडसीपी के बीच समन्वय की कमी से सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। रिपोर्ट ने शहरी नियोजन व्यवस्था में त्वरित सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
आंकड़ों का विवरण: वर्ष 2018-23 के बीच जारी परमिट
वर्ष 2018-23 के बीच ननि द्वारा जारी किए गए भवन और विकास परमिटों, साथ ही टीएंडसीपी द्वारा जारी किए गए विकास परमिटों की जानकारी नीचे दी गई है:
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