
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) भोपाल की सहायक प्राध्यापक डाॅ. रश्मि वर्मा की आत्महत्या का संज्ञान लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, एम्स भोपाल के निदेशक और भोपाल पुलिस आयुक्त को नोटिस भेज कर 15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।
आयोग ने प्राधिकारियों से पाश (प्रीवेंशन आफ सेक्सुअल हरसमेंट) समिति की पूरी जानकारी, एफआईआर की कॉपी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मांगा है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि डाॅ. रश्मि ने आत्महत्या से पहले विभाग के एचओडी डॉ. मोहम्मद यूनुस के विरुद्ध तीन बार औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

प्रियंक कानूनगो, सदस्य-पीठ अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पोस्ट। सौ सोशल मीडिया।
- डा. रश्मि की तीनों शिकायतों पर एम्स प्रशासन ने डा. यूनुस के विरुद्ध क्या कदम उठाए?
- पोश कमेटी की बैठकों का विवरण और दर्ज किए गए बयान।
- एफआइआर की प्रति और अब तक हुई विवेचना की स्थिति।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों और समय का सटीक विवरण।
एम्स में एमरजेंसी एंड ट्रामा विभाग की सहायक प्राध्यापक प्रो. रश्मि वर्मा ने 11 दिसंबर को एनस्थिसिया दवाओं की ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की थी। उनको बचाने के लिए उनके साथी अगले 23 दिनों तक मौत से जंग लड़ते रहे, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका।
चार माह पहले भी सामने आई थी ऐसी शिकायत
एम्स भोपाल में उत्पीड़न का यह पहला मामला नहीं है। करीब 4 महीने पहले ट्रामा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. श्रुति दुबे ने भी एचओडी डा. मोहम्मद यूनुस के खिलाफ ऐसा ही आरोप लगाया था। दुबे ने आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि यूनुस ने उन्हें अकेले कमरे में बैठाकर धमकाया, मानसिक प्रताड़ना दी और करियर बर्बाद करने की चेतावनी दी। उन्होंने बताया था कि मीटिंग में सबके सामने उनका अपमान किया गया, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुकी थीं और नौकरी छोड़ने पर विचार कर रही थीं।
महिला असिस्टेंट प्रोफेसर रश्मि ने एचओडी डा. मोहम्मद यूनुस की प्रताड़ना से तंग आकर जान दी है। तीन बार शिकायत के बावजूद संस्थान का चुप रहना अक्षम्य है। हमने 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।