
नईदुनिया, प्रतिनिधि भोपाल। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में अब इलाज का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। अब सिर्फ वैद्य ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई भी तय करेगा कि किस मरीज को कौन सी जड़ी-बूटी और कौन सी दवा ज्यादा असर करेगी। पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में एआई आधारित इलाज की तैयारी शुरू हो गई है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि इससे इलाज ज्यादा सटीक और तेज होगा। यह प्रयोग सरकारी क्षेत्र में देश का पहला प्रयोग बताया जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यहां की ओपीडी में रोजाना 800 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। कई बार मरीज की पुरानी रिपोर्ट, लक्षण और उसकी प्रकृति को समझने में काफी समय लग जाता है। मरीजों की भीड़ ज्यादा होने से डॉक्टरों पर भी दबाव रहता है। इसी परेशानी को दूर करने और इलाज को आसान बनाने के लिए अस्पताल के आईटी सेल ने एक खास सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस सॉफ्टवेयर में मरीज से जुड़ी पूरी जानकारी को फीड किया जाएगा ताकि एआई उसका विश्लेषण कर सके।
तैयार किए गए नए सिस्टम में मरीज के लक्षण, ब्लड रिपोर्ट, पुरानी बीमारी का इतिहास और नाड़ी परीक्षण का पूरा डेटा फीड किया जाएगा। इसके बाद एआई एनालिसिस करके बताएगा कि उस मरीज के लिए कौन सा काढ़ा सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा, कौन सी भस्म असर करेगी, कौन सी पंचकर्म विधि जरूरी है और कौन सा योग करना चाहिए। यानी हर मरीज को उसकी प्रकृति के हिसाब से पर्सनलाइज्ड इलाज मिलेगा। इससे आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धति और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिलेगा।
इस नई पहल से दो बड़े फायदे होने की उम्मीद है। पहला फायदा मरीजों को होगा। जब इलाज मरीज की प्रकृति के हिसाब से तय होगा तो दवा का असर ज्यादा होगा और मरीज जल्दी ठीक होगा। दूसरा फायदा डॉक्टरों को होगा। एआई की मदद से उनका समय बचेगा और वे ज्यादा मरीजों को देख पाएंगे। अभी अस्पताल में एआई आधारित मशीनों की खरीदी प्रक्रिया चल रही है और दो सिस्टम पर ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। ट्रायल के नतीजे आने के बाद इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा।
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अस्पताल का कैंपस 50 एकड़ में फैला हुआ है। इस कैंपस में फिलहाल तीन बड़े प्रोजेक्ट पर एक साथ काम चल रहा है। यहां आयुर्वेदिक फार्मेसी, पंचकर्म वेलनेस सेंटर और अब एआई लैब, तीनों को विकसित किया जा रहा है। प्रबंधन का दावा है कि सरकारी क्षेत्र में एआई और आयुर्वेद का यह संगम देश में पहला प्रयोग होगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो प्रदेश के दूसरे आयुर्वेद अस्पतालों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी और युवाओं में भी इसके प्रति भरोसा बढ़ेगा।
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फिलहाल इसका ट्रायल चल रहा है। हम देख रहे हैं कि एआइ द्वारा सुझाई गई दवा और हमारे डाक्टरों के अनुभव में कितना अंतर है। ट्रायल के परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे जल्द ही ओपीडी में नियमित रूप से शुरू किया जाएगा। हमारा मकसद है कि आयुर्वेद को नई तकनीक से जोड़कर मरीजों को सटीक और जल्दी इलाज दिया जाए।
-डॉ.उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद अस्पताल व महाविद्यालय