फर्जी IAS कांड में खाकी पर उठे सवाल: भोपाल में FIR और मेमोरेंडम में दर्ज है नंबर, फिर भी TI के भाई पर मेहरबान पुलिस
फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह से जुड़े नौकरी ठगी मामले में रोहित लिल्हारे पर एसपी ऑफिस के कर्मचारी के रूप में फोन कर पुलिस वैरिफिकेशन और ज्वाइनिंग का भरोसा ...और पढ़ें
By bhupendra Singh RajputEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 11:01:30 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 11:01:30 PM (IST)
फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह । फाइल फोटो।HighLights
- टीआई के भाई पर एसपी ऑफिस कर्मचारी बनकर फोन करने का आरोप
- FIR और तृप्ति सिंह के मेमोरेंडम में रोहित के मोबाइल नंबर का उल्लेख
- एसपी ऑफिस के नाम के इस्तेमाल की जांच को लेकर पुलिस पर उठे सवाल
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह के ठगी के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अयोध्यानगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे के रिश्ते के भाई रोहित लिल्हारे पर आरोप है कि उसने एसपी ऑफिस का कर्मचारी बनकर फोन किया और मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के दौरान पुलिस वैरिफिकेशन और ज्वाइनिंग का भरोसा दिया।
पीड़िता की एफआईआर में रोहित के मोबाइल नंबर का उल्लेख है। तृप्ति सिंह के मेमोरेंडम में भी इस फोन नंबर का जिक्र है, इसके बावजूद बागसेवनिया पुलिस ने अब तक रोहित को आरोपी नहीं बनाया है।
ये है मामला
मामले में विरोधाभास यह है कि अगस्त में बागसेवनिया थाने में रोहित की शिकायत पर ही तृप्ति सिंह के खिलाफ 39 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि एमपीटी के होटल-रिजॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर रकम हड़पी गई।
इस मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु समेत दो अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। रोहित के एक दोस्त ने भी 49 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज कराया था।
नौकरी के नाम पर तीन लाख की ठगी में सामने आया नंबर
मामले का खुलासा तब हुआ, जब ख्याति धौलपुरे ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये की ठगी की शिकायत की। ख्याति के अनुसार, मार्च 2026 में उन्हें फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि तृप्ति सिंह मैडम ने उनका नंबर दिया है।
उनका पुलिस वैरिफिकेशन हो जाएगा और दस्तावेज सत्यापित हो चुके हैं। ज्वाइनिंग के संबंध में भी भरोसा दिलाया गया। इंटरनेट पर नंबर की जांच करने पर वह एसपी ऑफिस भोपाल के नाम से दिखाई दे रहा था।
इस मामले में 12 सितंबर को एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में रोहित के मोबाइल नंबर का उल्लेख होने के साथ तृप्ति सिंह के मेमोरेंडम में भी इसका जिक्र है।
इसके बावजूद पुलिस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि फोन किसने किया था और एसपी ऑफिस के नाम का इस्तेमाल किस आधार पर हुआ।
पुलिस का तर्क, नंबर का इस्तेमाल किसी और ने किया होगा
पुलिस का कहना है कि संभव है रोहित के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन फोन पर बात किसी अन्य व्यक्ति ने की हो। हालांकि, सवाल यह है कि यदि नंबर का इस्तेमाल हुआ तो उसकी जांच और फोन करने वाले की पहचान अब तक क्यों नहीं हो सकी। बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी और डीसीपी विकास शहवाल ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।