
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की मैदानी रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने म.प्र. आशा-आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ के बैनर तले प्रदेश में प्रदर्शन किया गया।
संघ की प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मी कौरव और प्रदेश महामंत्री ममता राजावत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री मोहन यादव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक के नाम कलेक्टर को एक 16 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने और सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों को जमीन पर उतारने के लिए आशा कार्यकर्ता 24-24 घंटे सेवाएं देती हैं।
इसके बावजूद विभाग में उनका वेतन सबसे कम है। आरोप है कि पिछले 20 वर्षों से सेवा देने के बाद भी उन्हें समय पर और पूरा वेतन नहीं मिल रहा है।
तीन-चार महीनों तक वेतन रोककर बाद में बजट की कमी का हवाला देकर मनमर्जी से कटौतियां कर दी जाती हैं। कार्यकर्ताओं को वेतन का कोई विवरण (सैलरी स्लिप) भी नहीं दिया जाता।
- हर महीने की पांच तारीख तक बिना किसी कटौती के नियमित वेतन का भुगतान हो और पारदर्शिता के लिए वेतन पर्ची दी जाए।
- वर्ष 2024 से रुकी हुई 1000 रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि एरियर सहित दी जाए।
- आशाओं को 26,000 और पर्यवेक्षकों को 35,000 रुपये न्यूनतम वेतन व यात्रा भत्ता मिले, तब तक अंतरिम राहत के रूप में आशाओं को 10,000 रुपये प्रति माह दिया जाए।
- चुनावी ड्यूटी या आयुष्मान कार्ड जैसे गैर-विभागीय कार्य कराने पर अतिरिक्त भुगतान हो और बिना जांच मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति व अभद्र व्यवहार पर रोक लगे।